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विज्ञान, बुद्धि और संदेह

क्या अल्लाह के वजूद का कोई सबूत है?

संक्षिप्त जवाब

इस्लाम बुद्धि और प्रकृति से तर्क देता है: जिस ब्रह्मांड की शुरुआत है उसे एक कारण चाहिए, उसकी व्यवस्था और बारीक संतुलन एक रचयिता की ओर इशारा करते हैं, और इंसानों में अपने पैदा करने वाले का एक स्वाभाविक एहसास (फ़ितरत) है। क़ुरआन पूछता है, 'क्या वे बिना किसी चीज़ के पैदा हो गए, या वे ख़ुद पैदा करने वाले हैं?'

विस्तृत जवाब

क़ुरआन बार-बार लोगों को रात और दिन के आने-जाने, उस बारिश को जो मुर्दा ज़मीन को ज़िंदा करती है, इंसान की पैदाइश और सितारों को देखने की दावत देता है, सोचने वालों के लिए निशानियों के रूप में। वह अंधे विश्वास की माँग नहीं करता: वह ग़ौर करने की माँग करता है। मुस्लिम दार्शनिकों ने ब्रह्मांड की शुरुआत और आकस्मिकता से तर्क विकसित किए, जिन्होंने बाद में यूरोपीय चिंतकों को प्रभावित किया।

मुसलमान यह भी कहते हैं कि अल्लाह अनुभव से जाना जाता है: नमाज़ से, मुश्किल के बाद राहत से और उसे याद करने से मिलने वाले सुकून से। सबूत अलग-अलग तरह के होते हैं और ऐसे इंसान को संतुष्ट नहीं कर सकते जिसने पहले से फ़ैसला कर लिया हो। मुसलमान सच्चे जिज्ञासुओं को दावत देते हैं कि सवाल पूछें, क़ुरआन पढ़ें और सच्चे दिल से अल्लाह से मार्गदर्शन माँगें।

क़ुरआन से

أَمْ خُلِقُوا۟ مِنْ غَيْرِ شَىْءٍ أَمْ هُمُ ٱلْخَٰلِقُونَ ﴿٣٥﴾ أَمْ خَلَقُوا۟ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضَ ۚ بَل لَّا يُوقِنُونَ ﴿٣٦﴾

क्या ये लोग किसी के (पैदा किये) बग़ैर ही पैदा हो गए हैं या यही लोग (मख़लूक़ात के) पैदा करने वाले हैं या इन्होने ही ने सारे आसमान व ज़मीन पैदा किए हैं (नहीं) बल्कि ये लोग यक़ीन ही नहीं रखते

إِنَّ فِى خَلْقِ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ وَٱخْتِلَٰفِ ٱلَّيْلِ وَٱلنَّهَارِ لَءَايَٰتٍۢ لِّأُو۟لِى ٱلْأَلْبَٰبِ ﴿١٩٠﴾

इसमें तो शक ही नहीं कि आसमानों और ज़मीन की पैदाइश और रात दिन के फेर बदल में अक्लमन्दों के लिए (क़ुदरत ख़ुदा की) बहुत सी निशानियॉ हैं

فَأَقِمْ وَجْهَكَ لِلدِّينِ حَنِيفًۭا ۚ فِطْرَتَ ٱللَّهِ ٱلَّتِى فَطَرَ ٱلنَّاسَ عَلَيْهَا ۚ لَا تَبْدِيلَ لِخَلْقِ ٱللَّهِ ۚ ذَٰلِكَ ٱلدِّينُ ٱلْقَيِّمُ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ ٱلنَّاسِ لَا يَعْلَمُونَ ﴿٣٠﴾

तो (ऐ रसूल) तुम बातिल से कतरा के अपना रुख़ दीन की तरफ किए रहो यही ख़ुदा की बनावट है जिस पर उसने लोगों को पैदा किया है ख़ुदा की (दुरुस्त की हुई) बनावट में तग़य्युर तबद्दुल (उलट फेर) नहीं हो सकता यही मज़बूत और (बिल्कुल सीधा) दीन है मगर बहुत से लोग नहीं जानते हैं

إِنَّ فِى خَلْقِ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ وَٱخْتِلَٰفِ ٱلَّيْلِ وَٱلنَّهَارِ وَٱلْفُلْكِ ٱلَّتِى تَجْرِى فِى ٱلْبَحْرِ بِمَا يَنفَعُ ٱلنَّاسَ وَمَآ أَنزَلَ ٱللَّهُ مِنَ ٱلسَّمَآءِ مِن مَّآءٍۢ فَأَحْيَا بِهِ ٱلْأَرْضَ بَعْدَ مَوْتِهَا وَبَثَّ فِيهَا مِن كُلِّ دَآبَّةٍۢ وَتَصْرِيفِ ٱلرِّيَٰحِ وَٱلسَّحَابِ ٱلْمُسَخَّرِ بَيْنَ ٱلسَّمَآءِ وَٱلْأَرْضِ لَءَايَٰتٍۢ لِّقَوْمٍۢ يَعْقِلُونَ ﴿١٦٤﴾

बेशक आसमान व ज़मीन की पैदाइश और रात दिन के रद्दो बदल में और क़श्तियों जहाज़ों में जो लोगों के नफे क़ी चीज़े (माले तिजारत वगैरह दरिया) में ले कर चलते हैं और पानी में जो ख़ुदा ने आसमान से बरसाया फिर उस से ज़मीन को मुर्दा (बेकार) होने के बाद जिला दिया (शादाब कर दिया) और उस में हर क़िस्म के जानवर फैला दिये और हवाओं के चलाने में और अब्र में जो आसमान व ज़मीन के दरमियान ख़ुदा के हुक्म से घिरा रहता है (इन सब बातों में) अक्ल वालों के लिए बड़ी बड़ी निशानियाँ हैं

कृपया ध्यान दें

यह जवाब मुख्यधारा की सुन्नी समझ का अनुसरण करता है और सामान्य जानकारी है, फ़तवा नहीं। जहाँ मुसलमानों में मतभेद है, जवाब वह बता देता है। क्या आपका अपना कोई सवाल है? हमें लिखें.

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