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विज्ञान, बुद्धि और संदेह

इस्लाम चिकित्सा, सेहत और सफ़ाई के बारे में क्या कहता है?

संक्षिप्त जवाब

इस्लाम सेहत को एक नेमत मानता है, और लोगों से कहता है कि इलाज कराएँ, संतुलित खाएँ, साफ़ रहें और उससे बचें जो शरीर को नुक़सान पहुँचाए। पैग़ंबर ﷺ ने फ़रमाया, 'तुम्हारे शरीर का तुम पर हक़ है।'

विस्तृत जवाब

सफ़ाई ईमान का हिस्सा है: मुसलमान हर नमाज़ से पहले वुज़ू करते हैं, शौच के बाद पानी से धोते हैं और जुमे को नहाते हैं। पैग़ंबर ﷺ ने सिखाया कि पेट को खाने से एक तिहाई से ज़्यादा न भरो, दाँतों को मिस्वाक से साफ़ करो और प्लेग वाली जगह में न जाओ और न वहाँ से निकलो, जो क्वारंटीन की एक शुरुआती शिक्षा है।

मुसलमानों को चिकित्सा सेवा लेनी चाहिए और उसे अल्लाह का दिया हुआ ज़रिया मानना चाहिए। टीकाकरण को मुस्लिम आलिमों का भारी बहुमत स्वीकार करता है, क्योंकि वह जान की हिफ़ाज़त करता है, और अंग प्रत्यारोपण पर भी ज़्यादातर विद्वानों के फ़ैसले यही हैं। धूम्रपान और नशे जैसी हानिकारक चीज़ों को ज़्यादातर आलिम नापसंद या हराम कहते हैं।

क़ुरआन से

يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓا۟ إِذَا قُمْتُمْ إِلَى ٱلصَّلَوٰةِ فَٱغْسِلُوا۟ وُجُوهَكُمْ وَأَيْدِيَكُمْ إِلَى ٱلْمَرَافِقِ وَٱمْسَحُوا۟ بِرُءُوسِكُمْ وَأَرْجُلَكُمْ إِلَى ٱلْكَعْبَيْنِ ۚ وَإِن كُنتُمْ جُنُبًۭا فَٱطَّهَّرُوا۟ ۚ وَإِن كُنتُم مَّرْضَىٰٓ أَوْ عَلَىٰ سَفَرٍ أَوْ جَآءَ أَحَدٌۭ مِّنكُم مِّنَ ٱلْغَآئِطِ أَوْ لَٰمَسْتُمُ ٱلنِّسَآءَ فَلَمْ تَجِدُوا۟ مَآءًۭ فَتَيَمَّمُوا۟ صَعِيدًۭا طَيِّبًۭا فَٱمْسَحُوا۟ بِوُجُوهِكُمْ وَأَيْدِيكُم مِّنْهُ ۚ مَا يُرِيدُ ٱللَّهُ لِيَجْعَلَ عَلَيْكُم مِّنْ حَرَجٍۢ وَلَٰكِن يُرِيدُ لِيُطَهِّرَكُمْ وَلِيُتِمَّ نِعْمَتَهُۥ عَلَيْكُمْ لَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ ﴿٦﴾

ऐ ईमानदारों जब तुम नमाज़ के लिये आमादा हो तो अपने मुंह और कोहनियों तक हाथ धो लिया करो और अपने सरों का और टखनों तक पॉवों का मसाह कर लिया करो और अगर तुम हालते जनाबत में हो तो तुम तहारत (ग़ुस्ल) कर लो (हॉ) और अगर तुम बीमार हो या सफ़र में हो या तुममें से किसी को पैख़ाना निकल आए या औरतों से हमबिस्तरी की हो और तुमको पानी न मिल सके तो पाक ख़ाक से तैमूम कर लो यानि (दोनों हाथ मारकर) उससे अपने मुंह और अपने हाथों का मसा कर लो (देखो तो ख़ुदा ने कैसी आसानी कर दी) ख़ुदा तो ये चाहता ही नहीं कि तुम पर किसी तरह की तंगी करे बल्कि वो ये चाहता है कि पाक व पाकीज़ा कर दे और तुमपर अपनी नेअमते पूरी कर दे ताकि तुम शुक्रगुज़ार बन जाओ

۞ يَٰبَنِىٓ ءَادَمَ خُذُوا۟ زِينَتَكُمْ عِندَ كُلِّ مَسْجِدٍۢ وَكُلُوا۟ وَٱشْرَبُوا۟ وَلَا تُسْرِفُوٓا۟ ۚ إِنَّهُۥ لَا يُحِبُّ ٱلْمُسْرِفِينَ ﴿٣١﴾

ऐ औलाद आदम हर नमाज़ के वक्त बन सवर के निखर जाया करो और खाओ और पियो और फिज़ूल ख़र्ची मत करो (क्योंकि) ख़ुदा फिज़ूल ख़र्च करने वालों को दोस्त नहीं रखता

स्रोत

इस जवाब के पीछे की हदीसें और रिवायतें। किसी नंबर को खोलकर उसे sunnah.com पर पढ़ें।

  • Sahih al-Bukhari 6134 प्रामाणिक, हदीस के विद्वानों की सहमति से
  • Jami' at-Tirmidhi 2380 Sahih (Al-Albani)
  • Sahih al-Bukhari 5678 प्रामाणिक, हदीस के विद्वानों की सहमति से
  • Sahih al-Bukhari 5728 प्रामाणिक, हदीस के विद्वानों की सहमति से
कृपया ध्यान दें

यह जवाब मुख्यधारा की सुन्नी समझ का अनुसरण करता है और सामान्य जानकारी है, फ़तवा नहीं। जहाँ मुसलमानों में मतभेद है, जवाब वह बता देता है। क्या आपका अपना कोई सवाल है? हमें लिखें.

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