Muslim Flow का परीक्षण चल रहा है और यह जल्द ही Google Play पर आ रहा है। डाउनलोड

विज्ञान, बुद्धि और संदेह

इस्लाम बिग बैंग और ब्रह्मांड की उम्र के बारे में क्या कहता है?

संक्षिप्त जवाब

क़ुरआन कहता है कि आसमान और ज़मीन कभी जुड़े हुए थे और फिर अलग किए गए, कि आसमान फैल रहे हैं और सृष्टि छह 'दिनों' या अवधियों में हुई। क़ुरआन ब्रह्मांड की उम्र नहीं बताता, और मुसलमान आम तौर पर वैज्ञानिक अनुमानों को क़बूल करते हैं।

विस्तृत जवाब

क़ुरआन में 'यौम' (दिन) शब्द किसी भी लंबाई की अवधि का अर्थ दे सकता है, और क़ुरआन कहता है कि अल्लाह के यहाँ एक दिन हज़ार साल जैसा हो सकता है। इसलिए सृष्टि के छह दिन धरती के दिनों की कोई संख्या तय नहीं करते। मुस्लिम आलिम अक्सर आयत 21:30, जो आसमान और ज़मीन के जुड़े होने और अलग होने के बारे में है, और आयत 51:47, जो आसमानों के फैलाए जाने के बारे में है, को बिग बैंग और फैलते ब्रह्मांड से जोड़ते हैं।

कुछ मुसलमान इन तुलनाओं में सावधान रहते हैं। विज्ञान बदलता है, और क़ुरआन मार्गदर्शन की किताब है। इन आयतों का मक़सद अल्लाह की क़ुदरत की ओर ध्यान दिलाना है, और मुसलमान इन्हें ग़ौर करने की निशानियाँ मानते हैं, हर आयत को विज्ञान से साबित करने की ज़रूरत के बिना।

क़ुरआन से

أَوَلَمْ يَرَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوٓا۟ أَنَّ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضَ كَانَتَا رَتْقًۭا فَفَتَقْنَٰهُمَا ۖ وَجَعَلْنَا مِنَ ٱلْمَآءِ كُلَّ شَىْءٍ حَىٍّ ۖ أَفَلَا يُؤْمِنُونَ ﴿٣٠﴾

जो लोग काफिर हो बैठे क्या उन लोगों ने इस बात पर ग़ौर नहीं किया कि आसमान और ज़मीन दोनों बस्ता (बन्द) थे तो हमने दोनों को शिगाफ़ता किया (खोल दिया) और हम ही ने जानदार चीज़ को पानी से पैदा किया इस पर भी ये लोग ईमान न लाएँगे

وَٱلسَّمَآءَ بَنَيْنَٰهَا بِأَيْي۟دٍۢ وَإِنَّا لَمُوسِعُونَ ﴿٤٧﴾

और हमने आसमानों को अपने बल बूते से बनाया और बेशक हममें सब क़ुदरत है

إِنَّ رَبَّكُمُ ٱللَّهُ ٱلَّذِى خَلَقَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضَ فِى سِتَّةِ أَيَّامٍۢ ثُمَّ ٱسْتَوَىٰ عَلَى ٱلْعَرْشِ يُغْشِى ٱلَّيْلَ ٱلنَّهَارَ يَطْلُبُهُۥ حَثِيثًۭا وَٱلشَّمْسَ وَٱلْقَمَرَ وَٱلنُّجُومَ مُسَخَّرَٰتٍۭ بِأَمْرِهِۦٓ ۗ أَلَا لَهُ ٱلْخَلْقُ وَٱلْأَمْرُ ۗ تَبَارَكَ ٱللَّهُ رَبُّ ٱلْعَٰلَمِينَ ﴿٥٤﴾

बेशक उन लोगों ने अपना सख्त घाटा किया और जो इफ़तेरा परदाज़िया किया करते थे वह सब गायब (ग़ल्ला) हो गयीं बेशक तुम्हारा परवरदिगार ख़ुदा ही है जिसके (सिर्फ) 6 दिनों में आसमान और ज़मीन को पैदा किया फिर अर्श के बनाने पर आमादा हुआ वही रात को दिन का लिबास पहनाता है तो (गोया) रात दिन को पीछे पीछे तेज़ी से ढूंढती फिरती है और उसी ने आफ़ताब और माहताब और सितारों को पैदा किया कि ये सब के सब उसी के हुक्म के ताबेदार हैं

وَيَسْتَعْجِلُونَكَ بِٱلْعَذَابِ وَلَن يُخْلِفَ ٱللَّهُ وَعْدَهُۥ ۚ وَإِنَّ يَوْمًا عِندَ رَبِّكَ كَأَلْفِ سَنَةٍۢ مِّمَّا تَعُدُّونَ ﴿٤٧﴾

और (ऐ रसूल) तुम से ये लोग अज़ाब के जल्द आने की तमन्ना रखते हैं और खुदा तो हरगिज़ अपने वायदे के ख़िलाफ नहीं करेगा और बेशक (क़यामत का) एक दिन तुम्हारे परवरदिगार के नज़दीक तुम्हारी गिनती के हिसाब से एक हज़ार बरस के बराबर है

कृपया ध्यान दें

यह जवाब मुख्यधारा की सुन्नी समझ का अनुसरण करता है और सामान्य जानकारी है, फ़तवा नहीं। जहाँ मुसलमानों में मतभेद है, जवाब वह बता देता है। क्या आपका अपना कोई सवाल है? हमें लिखें.

WhatsApp