Muslim Flow का परीक्षण चल रहा है और यह जल्द ही Google Play पर आ रहा है। डाउनलोड

विज्ञान, बुद्धि और संदेह

क्या क़ुरआन में वैज्ञानिक चमत्कार हैं?

संक्षिप्त जवाब

बहुत से मुसलमान उन आयतों की ओर इशारा करते हैं जो प्राकृतिक घटनाओं का वर्णन करती हैं, जैसे गर्भ में मानव विकास के चरण, जल चक्र और सूरज और चाँद की कक्षाएँ, और उन्हें इस बात की निशानी मानते हैं कि क़ुरआन अल्लाह की ओर से है। दूसरे मुसलमान और आलिम विज्ञान को ईमान का सबूत बनाने के ख़िलाफ़ चेताते हैं।

विस्तृत जवाब

क़ुरआन मानव भ्रूण का चरणों में वर्णन करता है (23:12-14) और कहता है कि हर जीवित चीज़ पानी से बनाई गई, और हर खगोलीय पिंड एक कक्षा में चलता है। समर्थक कहते हैं कि ये बातें 7वीं सदी के अरब में ज्ञात नहीं थीं। आलोचक जवाब देते हैं कि कुछ दावे खोज के बाद आयतों में पढ़ लिए जाते हैं, और विज्ञान बदलने पर ग़लत साबित हो सकते हैं।

एक सावधान तरीक़ा यह है कि क़ुरआन को पहले उसके मार्गदर्शन के लिए पढ़ा जाए, इन आयतों को निशानियाँ माना जाए और ब्योरों पर खुला रुख़ रखा जाए। मुसलमान मानते हैं कि क़ुरआन का सबसे बड़ा चमत्कार उसका अपना संदेश और भाषा है, और ईमान इस पर निर्भर नहीं करता कि उसे हर नए वैज्ञानिक सिद्धांत से मिलाया जाए।

क़ुरआन से

وَلَقَدْ خَلَقْنَا ٱلْإِنسَٰنَ مِن سُلَٰلَةٍۢ مِّن طِينٍۢ ﴿١٢﴾ ثُمَّ جَعَلْنَٰهُ نُطْفَةًۭ فِى قَرَارٍۢ مَّكِينٍۢ ﴿١٣﴾ ثُمَّ خَلَقْنَا ٱلنُّطْفَةَ عَلَقَةًۭ فَخَلَقْنَا ٱلْعَلَقَةَ مُضْغَةًۭ فَخَلَقْنَا ٱلْمُضْغَةَ عِظَٰمًۭا فَكَسَوْنَا ٱلْعِظَٰمَ لَحْمًۭا ثُمَّ أَنشَأْنَٰهُ خَلْقًا ءَاخَرَ ۚ فَتَبَارَكَ ٱللَّهُ أَحْسَنُ ٱلْخَٰلِقِينَ ﴿١٤﴾

और हमने आदमी को गीली मिट्टी के जौहर से पैदा किया फिर हमने उसको एक महफूज़ जगह (औरत के रहम में) नुत्फ़ा बना कर रखा फिर हम ही ने नुतफ़े को जमा हुआ ख़ून बनाया फिर हम ही ने मुनजमिद खून को गोश्त का लोथड़ा बनाया हम ही ने लोथडे क़ी हड्डियाँ बनायीं फिर हम ही ने हड्डियों पर गोश्त चढ़ाया फिर हम ही ने उसको (रुह डालकर) एक दूसरी सूरत में पैदा किया तो (सुबहान अल्लाह) ख़ुदा बा बरकत है जो सब बनाने वालो से बेहतर है

لَا ٱلشَّمْسُ يَنۢبَغِى لَهَآ أَن تُدْرِكَ ٱلْقَمَرَ وَلَا ٱلَّيْلُ سَابِقُ ٱلنَّهَارِ ۚ وَكُلٌّۭ فِى فَلَكٍۢ يَسْبَحُونَ ﴿٤٠﴾

न तो आफताब ही से ये बन पड़ता है कि वह माहताब को जा ले और न रात ही दिन से आगे बढ़ सकती है (चाँद, सूरज, सितारे) हर एक अपने-अपने आसमान (मदार) में चक्कर लगा रहें हैं

أَوَلَمْ يَرَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوٓا۟ أَنَّ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضَ كَانَتَا رَتْقًۭا فَفَتَقْنَٰهُمَا ۖ وَجَعَلْنَا مِنَ ٱلْمَآءِ كُلَّ شَىْءٍ حَىٍّ ۖ أَفَلَا يُؤْمِنُونَ ﴿٣٠﴾

जो लोग काफिर हो बैठे क्या उन लोगों ने इस बात पर ग़ौर नहीं किया कि आसमान और ज़मीन दोनों बस्ता (बन्द) थे तो हमने दोनों को शिगाफ़ता किया (खोल दिया) और हम ही ने जानदार चीज़ को पानी से पैदा किया इस पर भी ये लोग ईमान न लाएँगे

कृपया ध्यान दें

यह जवाब मुख्यधारा की सुन्नी समझ का अनुसरण करता है और सामान्य जानकारी है, फ़तवा नहीं। जहाँ मुसलमानों में मतभेद है, जवाब वह बता देता है। क्या आपका अपना कोई सवाल है? हमें लिखें.

WhatsApp