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जीवन, मृत्यु और आख़िरत

अगर अल्लाह ने सब कुछ तय कर दिया है, तो क्या इंसान के पास इख़्तियार है?

संक्षिप्त जवाब

मुसलमान मानते हैं कि अल्लाह वह सब जानता है जो होने वाला है, और उसने उसे लिख रखा है, और यह भी कि इंसान के पास असली चुनाव है और वह अपने चुनाव का ज़िम्मेदार है। दोनों बातें साथ रखी जाती हैं: अल्लाह का इल्म किसी को कुछ करने पर मजबूर नहीं करता।

विस्तृत जवाब

इसे समझने का एक आसान तरीक़ा: जो शिक्षक जानता है कि उसका विद्यार्थी फ़ेल होगा, वह उसे फ़ेल नहीं करता। अल्लाह का इल्म समय से बाहर है, इसलिए वह जानता है कि हर इंसान क्या चुनेगा, और चुनाव उसी का रहता है। क़ुरआन कहता है 'जो चाहे ईमान लाए और जो चाहे इनकार करे', और यह भी कि अल्लाह की मर्ज़ी के सिवा कुछ नहीं होता।

रोज़मर्रा के जीवन में यह विश्वास मुसलमान को ताक़त देता है: साधन अपनाओ, मेहनत और योजना करो, फिर जो आए उसे भरोसे और सब्र से क़बूल करो, नुक़सान पर निराशा और कामयाबी पर घमंड के बिना। पैग़ंबर ﷺ ने सिखाया, 'पहले ऊँट बाँधो, फिर अल्लाह पर भरोसा करो' (तिर्मिज़ी की एक हदीस जिसे अल्बानी ने हसन कहा)।

क़ुरआन से

وَقُلِ ٱلْحَقُّ مِن رَّبِّكُمْ ۖ فَمَن شَآءَ فَلْيُؤْمِن وَمَن شَآءَ فَلْيَكْفُرْ ۚ إِنَّآ أَعْتَدْنَا لِلظَّٰلِمِينَ نَارًا أَحَاطَ بِهِمْ سُرَادِقُهَا ۚ وَإِن يَسْتَغِيثُوا۟ يُغَاثُوا۟ بِمَآءٍۢ كَٱلْمُهْلِ يَشْوِى ٱلْوُجُوهَ ۚ بِئْسَ ٱلشَّرَابُ وَسَآءَتْ مُرْتَفَقًا ﴿٢٩﴾

और (ऐ रसूल) तुम कह दों कि सच्ची बात (कलमए तौहीद) तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से (नाज़िल हो चुकी है) बस जो चाहे माने और जो चाहे न माने (मगर) हमने ज़ालिमों के लिए वह आग (दहका के) तैयार कर रखी है जिसकी क़नातें उन्हें घेर लेगी और अगर वह लोग दोहाई करेगें तो उनकी फरियाद रसी खौलते हुए पानी से की जाएगी जो मसलन पिघले हुए ताबें की तरह होगा (और) वह मुँह को भून डालेगा क्या बुरा पानी है और (जहन्नुम भी) क्या बुरी जगह है

مَآ أَصَابَ مِن مُّصِيبَةٍۢ فِى ٱلْأَرْضِ وَلَا فِىٓ أَنفُسِكُمْ إِلَّا فِى كِتَٰبٍۢ مِّن قَبْلِ أَن نَّبْرَأَهَآ ۚ إِنَّ ذَٰلِكَ عَلَى ٱللَّهِ يَسِيرٌۭ ﴿٢٢﴾

जितनी मुसीबतें रूए ज़मीन पर और ख़ुद तुम लोगों पर नाज़िल होती हैं (वह सब) क़ब्ल इसके कि हम उन्हें पैदा करें किताब (लौह महफूज़) में (लिखी हुई) हैं बेशक ये ख़ुदा पर आसान है

إِنَّا هَدَيْنَٰهُ ٱلسَّبِيلَ إِمَّا شَاكِرًۭا وَإِمَّا كَفُورًا ﴿٣﴾

और उसको रास्ता भी दिखा दिया (अब वह) ख्वाह शुक्र गुज़ार हो ख्वाह नाशुक्रा

وَمَا تَشَآءُونَ إِلَّآ أَن يَشَآءَ ٱللَّهُ رَبُّ ٱلْعَٰلَمِينَ ﴿٢٩﴾

और तुम तो सारे जहॉन के पालने वाले ख़ुदा के चाहे बग़ैर कुछ भी चाह नहीं सकते

स्रोत

इस जवाब के पीछे की हदीसें और रिवायतें। किसी नंबर को खोलकर उसे sunnah.com पर पढ़ें।

कृपया ध्यान दें

यह जवाब मुख्यधारा की सुन्नी समझ का अनुसरण करता है और सामान्य जानकारी है, फ़तवा नहीं। जहाँ मुसलमानों में मतभेद है, जवाब वह बता देता है। क्या आपका अपना कोई सवाल है? हमें लिखें.

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