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जीवन, मृत्यु और आख़िरत

इस्लाम में जहन्नम क्या है और वहाँ कौन जाता है?

संक्षिप्त जवाब

जहन्नम उन लोगों के लिए सज़ा की जगह है जो अल्लाह को ठुकराते हुए और गंभीर ग़लत करते हुए मरते हैं, जैसे ज़ुल्म और सच के साफ़ हो जाने के बाद उसका इनकार। यह क़ुरआन में एक कड़ी चेतावनी है, और मुसलमान यह भी मानते हैं कि अल्लाह की रहमत विशाल है और वह जिसे चाहे माफ़ कर देता है।

विस्तृत जवाब

क़ुरआन जहन्नम का वर्णन आग और तकलीफ़ के साथ चेतावनी के रूप में करता है ताकि लोग भलाई की ओर बढ़ें। वह कहता है कि अल्लाह किसी पर ज़ुल्म नहीं करता, और हर इंसान का फ़ैसला इस पर होता है कि वह क्या जानता था और क्या किया। बहुत से आलिम मानते हैं कि जिस मुसलमान ने गुनाह किए पर ईमान बनाए रखा, उसे सज़ा देकर निकाला जा सकता है, या सीधे माफ़ किया जा सकता है, और अल्लाह के साथ शरीक ठहराने का गुनाह बिना तौबा के माफ़ नहीं किया जाता।

मुसलमान मानते हैं कि कोई इंसान नहीं जान सकता कि जहन्नम में कौन है। पैग़ंबर ﷺ ने सिखाया कि अल्लाह अपने बंदे पर माँ से भी ज़्यादा रहम करने वाला है, और एक आदमी को प्यासे कुत्ते को पानी पिलाने पर माफ़ कर दिया गया। मुसलमानों से कहा गया है कि कभी किसी के अंजाम के बारे में पक्के न हों।

क़ुरआन से

إِنَّ ٱللَّهَ لَا يَغْفِرُ أَن يُشْرَكَ بِهِۦ وَيَغْفِرُ مَا دُونَ ذَٰلِكَ لِمَن يَشَآءُ ۚ وَمَن يُشْرِكْ بِٱللَّهِ فَقَدِ ٱفْتَرَىٰٓ إِثْمًا عَظِيمًا ﴿٤٨﴾

और ख़ुदा का हुक्म किया कराया हुआ काम समझो ख़ुदा उस जुर्म को तो अलबत्ता नहीं माफ़ करता कि उसके साथ शिर्क किया जाए हॉ उसके सिवा जो गुनाह हो जिसको चाहे माफ़ कर दे और जिसने (किसी को) ख़ुदा का शरीक बनाया तो उसने बड़े गुनाह का तूफान बॉधा

۞ قُلْ يَٰعِبَادِىَ ٱلَّذِينَ أَسْرَفُوا۟ عَلَىٰٓ أَنفُسِهِمْ لَا تَقْنَطُوا۟ مِن رَّحْمَةِ ٱللَّهِ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ يَغْفِرُ ٱلذُّنُوبَ جَمِيعًا ۚ إِنَّهُۥ هُوَ ٱلْغَفُورُ ٱلرَّحِيمُ ﴿٥٣﴾

(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ऐ मेरे (ईमानदार) बन्दों जिन्होने (गुनाह करके) अपनी जानों पर ज्यादतियाँ की हैं तुम लोग ख़ुदा की रहमत से नाउम्मीद न होना बेशक ख़ुदा (तुम्हारे) कुल गुनाहों को बख्श देगा वह बेशक बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है

وَقُلِ ٱلْحَقُّ مِن رَّبِّكُمْ ۖ فَمَن شَآءَ فَلْيُؤْمِن وَمَن شَآءَ فَلْيَكْفُرْ ۚ إِنَّآ أَعْتَدْنَا لِلظَّٰلِمِينَ نَارًا أَحَاطَ بِهِمْ سُرَادِقُهَا ۚ وَإِن يَسْتَغِيثُوا۟ يُغَاثُوا۟ بِمَآءٍۢ كَٱلْمُهْلِ يَشْوِى ٱلْوُجُوهَ ۚ بِئْسَ ٱلشَّرَابُ وَسَآءَتْ مُرْتَفَقًا ﴿٢٩﴾

और (ऐ रसूल) तुम कह दों कि सच्ची बात (कलमए तौहीद) तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से (नाज़िल हो चुकी है) बस जो चाहे माने और जो चाहे न माने (मगर) हमने ज़ालिमों के लिए वह आग (दहका के) तैयार कर रखी है जिसकी क़नातें उन्हें घेर लेगी और अगर वह लोग दोहाई करेगें तो उनकी फरियाद रसी खौलते हुए पानी से की जाएगी जो मसलन पिघले हुए ताबें की तरह होगा (और) वह मुँह को भून डालेगा क्या बुरा पानी है और (जहन्नुम भी) क्या बुरी जगह है

بَلَىٰ مَن كَسَبَ سَيِّئَةًۭ وَأَحَٰطَتْ بِهِۦ خَطِيٓـَٔتُهُۥ فَأُو۟لَٰٓئِكَ أَصْحَٰبُ ٱلنَّارِ ۖ هُمْ فِيهَا خَٰلِدُونَ ﴿٨١﴾

हाँ (सच तो यह है) कि जिसने बुराई हासिल की और उसके गुनाहों ने चारों तरफ से उसे घेर लिया है वही लोग तो दोज़ख़ी हैं और वही (तो) उसमें हमेशा रहेंगे

स्रोत

इस जवाब के पीछे की हदीसें और रिवायतें। किसी नंबर को खोलकर उसे sunnah.com पर पढ़ें।

  • Sahih al-Bukhari 6009 प्रामाणिक, हदीस के विद्वानों की सहमति से
  • Sahih al-Bukhari 5999 प्रामाणिक, हदीस के विद्वानों की सहमति से
कृपया ध्यान दें

यह जवाब मुख्यधारा की सुन्नी समझ का अनुसरण करता है और सामान्य जानकारी है, फ़तवा नहीं। जहाँ मुसलमानों में मतभेद है, जवाब वह बता देता है। क्या आपका अपना कोई सवाल है? हमें लिखें.

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