فَلَا تَعْلَمُ نَفْسٌۭ مَّآ أُخْفِىَ لَهُم مِّن قُرَّةِ أَعْيُنٍۢ جَزَآءًۢ بِمَا كَانُوا۟ يَعْمَلُونَ ﴿١٧﴾
उन लोगों की कारगुज़ारियों के बदले में कैसी कैसी ऑंखों की ठन्डक उनके लिए ढकी छिपी रखी है उसको कोई शख़्श जानता ही नहीं
जन्नत को स्थायी शांति और आनंद के बाग़ के रूप में बताया गया है जिसमें नहरें, फल हैं, कोई ग़म, बीमारी और मौत नहीं, और सबसे बढ़कर अल्लाह की रज़ा और उसका दीदार है। पैग़ंबर ﷺ ने फ़रमाया कि उसमें वह है जो किसी आँख ने नहीं देखा, किसी कान ने नहीं सुना और किसी दिल ने नहीं सोचा।
क़ुरआन ऐसे बाग़ों का वर्णन करता है जिनके नीचे नहरें बहती हैं, आरामदेह घर, रेशमी कपड़े, और नेक लोगों और उनके परिवारों का साथ, और कहता है कि सबसे बड़ा इनाम अल्लाह की रज़ा है। क्योंकि वह इंसानी अनुभव से परे है, वर्णन ऐसी छवियों में दिए गए हैं जिन्हें लोग समझ सकें।
क़ुरआन नेक लोगों के लिए 'हूर', पाक साथियों, का भी ज़िक्र करता है, और ईमान वाले मर्दों और औरतों दोनों से वादा करता है कि वे अपने जोड़ों के साथ जन्नत में दाख़िल होंगे। 72 कुँवारियों की लोकप्रिय संख्या क़ुरआन में नहीं है: यह तिर्मिज़ी की एक अकेली हदीस से आती है जिसे अल्बानी और अहमद शाकिर ने ज़ईफ़ कहा। जन्नत औरतों और मर्दों दोनों के लिए खुली है, और उसमें सबसे बड़ा इनाम अल्लाह की रज़ा है।
فَلَا تَعْلَمُ نَفْسٌۭ مَّآ أُخْفِىَ لَهُم مِّن قُرَّةِ أَعْيُنٍۢ جَزَآءًۢ بِمَا كَانُوا۟ يَعْمَلُونَ ﴿١٧﴾
उन लोगों की कारगुज़ारियों के बदले में कैसी कैसी ऑंखों की ठन्डक उनके लिए ढकी छिपी रखी है उसको कोई शख़्श जानता ही नहीं
وَبَشِّرِ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّٰلِحَٰتِ أَنَّ لَهُمْ جَنَّٰتٍۢ تَجْرِى مِن تَحْتِهَا ٱلْأَنْهَٰرُ ۖ كُلَّمَا رُزِقُوا۟ مِنْهَا مِن ثَمَرَةٍۢ رِّزْقًۭا ۙ قَالُوا۟ هَٰذَا ٱلَّذِى رُزِقْنَا مِن قَبْلُ ۖ وَأُتُوا۟ بِهِۦ مُتَشَٰبِهًۭا ۖ وَلَهُمْ فِيهَآ أَزْوَٰجٌۭ مُّطَهَّرَةٌۭ ۖ وَهُمْ فِيهَا خَٰلِدُونَ ﴿٢٥﴾
और जो लोग ईमान लाए और उन्होंने नेक काम किए उनको (ऐ पैग़म्बर) खुशख़बरी दे दो कि उनके लिए (बेहिश्त के) वह बाग़ात हैं जिनके नीचे नहरे जारी हैं जब उन्हें इन बाग़ात का कोई मेवा खाने को मिलेगा तो कहेंगे ये तो वही (मेवा है जो पहले भी हमें खाने को मिल चुका है) (क्योंकि) उन्हें मिलती जुलती सूरत व रंग के (मेवे) मिला करेंगे और बेहिश्त में उनके लिए साफ सुथरी बीवियाँ होगी और ये लोग उस बाग़ में हमेशा रहेंगे
وَعَدَ ٱللَّهُ ٱلْمُؤْمِنِينَ وَٱلْمُؤْمِنَٰتِ جَنَّٰتٍۢ تَجْرِى مِن تَحْتِهَا ٱلْأَنْهَٰرُ خَٰلِدِينَ فِيهَا وَمَسَٰكِنَ طَيِّبَةًۭ فِى جَنَّٰتِ عَدْنٍۢ ۚ وَرِضْوَٰنٌۭ مِّنَ ٱللَّهِ أَكْبَرُ ۚ ذَٰلِكَ هُوَ ٱلْفَوْزُ ٱلْعَظِيمُ ﴿٧٢﴾
ख़ुदा ने ईमानदार मर्दों और ईमानदारा औरतों से (बेहश्त के) उन बाग़ों का वायदा कर लिया है जिनके नीचे नहरें जारी हैं और वह उनमें हमेशा रहेगें (बेहश्त) अदन के बाग़ो में उम्दा उम्दा मकानात का (भी वायदा फरमाया) और ख़ुदा की ख़ुशनूदी उन सबसे बालातर है- यही तो बड़ी (आला दर्जे की) कामयाबी है
ٱدْخُلُوا۟ ٱلْجَنَّةَ أَنتُمْ وَأَزْوَٰجُكُمْ تُحْبَرُونَ ﴿٧٠﴾
तो तुम अपनी बीवियों समैत एजाज़ व इकराम से बेहिश्त में दाखिल हो जाओ
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यह जवाब मुख्यधारा की सुन्नी समझ का अनुसरण करता है और सामान्य जानकारी है, फ़तवा नहीं। जहाँ मुसलमानों में मतभेद है, जवाब वह बता देता है। क्या आपका अपना कोई सवाल है? हमें लिखें.