Muslim Flow का परीक्षण चल रहा है और यह जल्द ही Google Play पर आ रहा है। डाउनलोड

जीवन, मृत्यु और आख़िरत

अल्लाह तकलीफ़ और बुराई क्यों होने देता है?

संक्षिप्त जवाब

इस्लाम सिखाता है कि यह जीवन एक इम्तिहान है, और तकलीफ़ उसका हिस्सा है: इस बात का संकेत नहीं कि अल्लाह को परवाह नहीं। अल्लाह इंसाफ़ करने वाला और हिकमत वाला है, और सब्र के साथ सही गई हर मुश्किल सवाब और गुनाहों की माफ़ी लाती है, जबकि लोगों का ज़ुल्म क़यामत के दिन चुकता किया जाएगा।

विस्तृत जवाब

क़ुरआन कहता है कि अल्लाह लोगों को कुछ डर, भूख और माल, जान और फलों के नुक़सान से ज़रूर आज़माएगा, और सब्र करने वालों को ख़ुशख़बरी देता है। वह यह भी कहता है कि हर मुश्किल के साथ आसानी है, और अल्लाह किसी जान पर उसकी सामर्थ्य से ज़्यादा बोझ नहीं डालता। मुसलमान तकलीफ़ में विकास, विनम्रता और अल्लाह से गहरे रिश्ते का मौक़ा देखते हैं, और दूसरों के लिए मदद की पुकार।

मुसलमान यह भी मानते हैं कि बहुत सी तकलीफ़ इंसानी ज़ुल्म से आती है जिसे अल्लाह इसलिए होने देता है कि उसने इंसानों को चुनाव की आज़ादी दी है, और अगली ज़िंदगी में सारे ग़लत सही कर दिए जाएँगे: मज़लूम को इंसाफ़ मिलेगा और एक बेगुनाह बच्चे के दर्द का जवाब बड़े इनाम से दिया जाएगा। हर धर्म की तरह इस्लाम हर मामले को समझाने का दावा नहीं करता, और वह अल्लाह की हिकमत पर भरोसे की माँग करता है।

क़ुरआन से

وَلَنَبْلُوَنَّكُم بِشَىْءٍۢ مِّنَ ٱلْخَوْفِ وَٱلْجُوعِ وَنَقْصٍۢ مِّنَ ٱلْأَمْوَٰلِ وَٱلْأَنفُسِ وَٱلثَّمَرَٰتِ ۗ وَبَشِّرِ ٱلصَّٰبِرِينَ ﴿١٥٥﴾

और हम तुम्हें कुछ खौफ़ और भूख से और मालों और जानों और फलों की कमी से ज़रुर आज़माएगें और (ऐ रसूल) ऐसे सब्र करने वालों को ख़ुशख़बरी दे दो

لَا يُكَلِّفُ ٱللَّهُ نَفْسًا إِلَّا وُسْعَهَا ۚ لَهَا مَا كَسَبَتْ وَعَلَيْهَا مَا ٱكْتَسَبَتْ ۗ رَبَّنَا لَا تُؤَاخِذْنَآ إِن نَّسِينَآ أَوْ أَخْطَأْنَا ۚ رَبَّنَا وَلَا تَحْمِلْ عَلَيْنَآ إِصْرًۭا كَمَا حَمَلْتَهُۥ عَلَى ٱلَّذِينَ مِن قَبْلِنَا ۚ رَبَّنَا وَلَا تُحَمِّلْنَا مَا لَا طَاقَةَ لَنَا بِهِۦ ۖ وَٱعْفُ عَنَّا وَٱغْفِرْ لَنَا وَٱرْحَمْنَآ ۚ أَنتَ مَوْلَىٰنَا فَٱنصُرْنَا عَلَى ٱلْقَوْمِ ٱلْكَٰفِرِينَ ﴿٢٨٦﴾

और मान लिया परवरदिगार हमें तेरी ही मग़फ़िरत की (ख्वाहिश है) और तेरी ही तरफ़ लौट कर जाना है ख़ुदा किसी को उसकी ताक़त से ज्यादा तकलीफ़ नहीं देता उसने अच्छा काम किया तो अपने नफ़े के लिए और बुरा काम किया तो (उसका वबाल) उसी पर पडेग़ा ऐ हमारे परवरदिगार अगर हम भूल जाऐं या ग़लती करें तो हमारी गिरफ्त न कर ऐ हमारे परवरदिगार हम पर वैसा बोझ न डाल जैसा हमसे अगले लोगों पर बोझा डाला था, और ऐ हमारे परवरदिगार इतना बोझ जिसके उठाने की हमें ताक़त न हो हमसे न उठवा और हमारे कुसूरों से दरगुज़र कर और हमारे गुनाहों को बख्श दे और हम पर रहम फ़रमा तू ही हमारा मालिक है तू ही काफ़िरों के मुक़ाबले में हमारी मदद कर

فَإِنَّ مَعَ ٱلْعُسْرِ يُسْرًا ﴿٥﴾ إِنَّ مَعَ ٱلْعُسْرِ يُسْرًۭا ﴿٦﴾

तो (हाँ) पस बेशक दुशवारी के साथ ही आसानी है यक़ीनन दुश्वारी के साथ आसानी है

ٱلَّذِى خَلَقَ ٱلْمَوْتَ وَٱلْحَيَوٰةَ لِيَبْلُوَكُمْ أَيُّكُمْ أَحْسَنُ عَمَلًۭا ۚ وَهُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلْغَفُورُ ﴿٢﴾

जिसने मौत और ज़िन्दगी को पैदा किया ताकि तुम्हें आज़माए कि तुममें से काम में सबसे अच्छा कौन है और वह ग़ालिब (और) बड़ा बख्शने वाला है

कृपया ध्यान दें

यह जवाब मुख्यधारा की सुन्नी समझ का अनुसरण करता है और सामान्य जानकारी है, फ़तवा नहीं। जहाँ मुसलमानों में मतभेद है, जवाब वह बता देता है। क्या आपका अपना कोई सवाल है? हमें लिखें.

WhatsApp