وَيْلٌۭ لِّكُلِّ هُمَزَةٍۢ لُّمَزَةٍ ﴿١﴾
हर ताना देने वाले चुग़लख़ोर की ख़राबी है
क़ुरआन की 104वीं सूरत
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
وَيْلٌۭ لِّكُلِّ هُمَزَةٍۢ لُّمَزَةٍ ﴿١﴾
हर ताना देने वाले चुग़लख़ोर की ख़राबी है
ٱلَّذِى جَمَعَ مَالًۭا وَعَدَّدَهُۥ ﴿٢﴾
जो माल को जमा करता है और गिन गिन कर रखता है
يَحْسَبُ أَنَّ مَالَهُۥٓ أَخْلَدَهُۥ ﴿٣﴾
वह समझता है कि उसका माल उसे हमेशा ज़िन्दा बाक़ी रखेगा
كَلَّا ۖ لَيُنۢبَذَنَّ فِى ٱلْحُطَمَةِ ﴿٤﴾
हरगिज़ नहीं वह तो ज़रूर हुतमा में डाला जाएगा
وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا ٱلْحُطَمَةُ ﴿٥﴾
और तुमको क्या मालूम हतमा क्या है
نَارُ ٱللَّهِ ٱلْمُوقَدَةُ ﴿٦﴾
वह ख़ुदा की भड़काई हुई आग है जो (तलवे से लगी तो) दिलों तक चढ़ जाएगी
ٱلَّتِى تَطَّلِعُ عَلَى ٱلْأَفْـِٔدَةِ ﴿٧﴾
ये लोग आग के लम्बे सुतूनो
إِنَّهَا عَلَيْهِم مُّؤْصَدَةٌۭ ﴿٨﴾
में डाल कर बन्द कर दिए
فِى عَمَدٍۢ مُّمَدَّدَةٍۭ ﴿٩﴾
जाएँगे
अरबी पाठ: उस्मानी लिपि। अनुवाद: Suhel Farooq Khan and Saifur Rahman Nadwi। ऑडियो: everyayah.com।
सूरह Al-Humazah (الهمزة) क़ुरआन की 104वीं सूरत है। इसमें 9 आयतें हैं और यह पारा 30 में है। इसे मक्की सूरत माना जाता है, यानी यह मुख्यतः नबी ﷺ की मदीना हिजरत से पहले उतरी।
इसका नाम, الهمزة, अरबी में इस सूरत की पहचान है।
सूरह Al-Humazah में 9 आयतें हैं।
वर्गीकरण: मक्की।
सूरह Al-Humazah पारा 30 में है।
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