تَبَّتْ يَدَآ أَبِى لَهَبٍۢ وَتَبَّ ﴿١﴾
अबु लहब के हाथ टूट जाएँ और वह ख़ुद सत्यानास हो जाए
क़ुरआन की 111वीं सूरत
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
تَبَّتْ يَدَآ أَبِى لَهَبٍۢ وَتَبَّ ﴿١﴾
अबु लहब के हाथ टूट जाएँ और वह ख़ुद सत्यानास हो जाए
مَآ أَغْنَىٰ عَنْهُ مَالُهُۥ وَمَا كَسَبَ ﴿٢﴾
(आख़िर) न उसका माल ही उसके हाथ आया और (न) उसने कमाया
سَيَصْلَىٰ نَارًۭا ذَاتَ لَهَبٍۢ ﴿٣﴾
वह बहुत भड़कती हुई आग में दाख़िल होगा
وَٱمْرَأَتُهُۥ حَمَّالَةَ ٱلْحَطَبِ ﴿٤﴾
और उसकी जोरू भी जो सर पर ईंधन उठाए फिरती है
فِى جِيدِهَا حَبْلٌۭ مِّن مَّسَدٍۭ ﴿٥﴾
और उसके गले में बटी हुई रस्सी बँधी है
अरबी पाठ: उस्मानी लिपि। अनुवाद: Suhel Farooq Khan and Saifur Rahman Nadwi। ऑडियो: everyayah.com।
सूरह Al-Masad (المسد) क़ुरआन की 111वीं सूरत है। इसमें 5 आयतें हैं और यह पारा 30 में है। इसे मक्की सूरत माना जाता है, यानी यह मुख्यतः नबी ﷺ की मदीना हिजरत से पहले उतरी।
इसका नाम, المسد, अरबी में इस सूरत की पहचान है।
सूरह Al-Masad में 5 आयतें हैं।
वर्गीकरण: मक्की।
सूरह Al-Masad पारा 30 में है।
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