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इतिहास, फ़िरक़े और आज के मुसलमान

क्या पैग़ंबर मुहम्मद ﷺ जंग के आदमी थे?

संक्षिप्त जवाब

पैग़ंबर ﷺ ने मक्का में 13 साल बिना लड़े ज़ुल्म सहते हुए बिताए। लड़ाई केवल तब शुरू हुई जब उन्हें और उनके समुदाय को निकाला जा चुका और उन पर हमला हो चुका था, और मदीना के दस सालों में आलिमों के अनुमान के अनुसार सारी लड़ाइयों में दोनों ओर मिलाकर लगभग एक हज़ार जानें गईं या उससे कम।

विस्तृत जवाब

मक्का वालों ने शुरुआती मुसलमानों को यातनाएँ दीं और क़त्ल किया, पैग़ंबर ﷺ के क़बीले का तीन साल तक बहिष्कार किया और उन्हें क़त्ल करने की साज़िश रची। मदीना हिजरत के बाद बद्र, उहुद और ख़ंदक़ की जंगें शहर की रक्षा के लिए लड़ी गईं। जहाँ संभव हुआ उन्होंने संधियों को तरजीह दी, जैसे हुदैबिया की संधि, और मक्का की फ़तह लगभग बिना ख़ून-ख़राबे के आम माफ़ी के साथ हुई।

आलोचक मदीना के यहूदी क़बीलों के ख़िलाफ़ लड़ाइयों की ओर इशारा करते हैं, जैसे बनू क़ुरैज़ा, जिन्होंने घेराबंदी के दौरान संधियाँ तोड़ीं। मुसलमान जवाब देते हैं कि ये युद्ध के समय देशद्रोह के संदर्भ में थीं और फ़ैसला उनके अपने सहयोगियों के एक नेता ने उनके अपने क़ानून के अनुसार किया था। मुसलमान पैग़ंबर के समग्र जीवन को रहमत का आदर्श मानते हैं, जैसा क़ुरआन उनका वर्णन करता है।

क़ुरआन से

أُذِنَ لِلَّذِينَ يُقَٰتَلُونَ بِأَنَّهُمْ ظُلِمُوا۟ ۚ وَإِنَّ ٱللَّهَ عَلَىٰ نَصْرِهِمْ لَقَدِيرٌ ﴿٣٩﴾

जिन (मुसलमानों) से (कुफ्फ़ार) लड़ते थे चूँकि वह (बहुत) सताए गए उस वजह से उन्हें भी (जिहाद) की इजाज़त दे दी गई और खुदा तो उन लोगों की मदद पर यक़ीनन क़ादिर (वत वाना) है

وَمَآ أَرْسَلْنَٰكَ إِلَّا رَحْمَةًۭ لِّلْعَٰلَمِينَ ﴿١٠٧﴾

और (ऐ रसूल) हमने तो तुमको सारे दुनिया जहाँन के लोगों के हक़ में अज़सरतापा रहमत बनाकर भेजा

وَقَٰتِلُوا۟ فِى سَبِيلِ ٱللَّهِ ٱلَّذِينَ يُقَٰتِلُونَكُمْ وَلَا تَعْتَدُوٓا۟ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ لَا يُحِبُّ ٱلْمُعْتَدِينَ ﴿١٩٠﴾

और जो लोग तुम से लड़े तुम (भी) ख़ुदा की राह में उनसे लड़ो और ज्यादती न करो (क्योंकि) ख़ुदा ज्यादती करने वालों को हरगिज़ दोस्त नहीं रखता

कृपया ध्यान दें

यह जवाब मुख्यधारा की सुन्नी समझ का अनुसरण करता है और सामान्य जानकारी है, फ़तवा नहीं। जहाँ मुसलमानों में मतभेद है, जवाब वह बता देता है। क्या आपका अपना कोई सवाल है? हमें लिखें.

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