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इतिहास, फ़िरक़े और आज के मुसलमान

सुन्नी और शिया मुसलमानों में क्या फ़र्क़ है?

संक्षिप्त जवाब

सुन्नी और शिया एक अल्लाह, क़ुरआन, पैग़ंबर मुहम्मद ﷺ और पाँच स्तंभों पर ईमान साझा रखते हैं। विभाजन इस बात पर शुरू हुआ कि पैग़ंबर की वफ़ात के बाद मुस्लिम समुदाय का नेतृत्व किसे करना चाहिए: सुन्नियों ने अबू बक्र और शुरुआती ख़लीफ़ाओं को माना, और शियाओं का मत था कि अली को उत्तराधिकारी होना चाहिए था।

विस्तृत जवाब

लगभग 85–90% मुसलमान सुन्नी हैं, और लगभग 10–15% शिया हैं, ज़्यादातर ईरान, इराक़, अज़रबैजान, बहरीन और लेबनान में। सदियों में क़ानून, इतिहास और अमल में अंतर उभरे: शिया अली और उनके परिवार के इमामों को ख़ास स्थान देते हैं, और उनकी अपनी हदीस की किताबें और अपने स्मरणोत्सव हैं, जैसे आशूरा।

ज़्यादातर सुन्नी और शिया मुसलमान इतिहास के ज़्यादातर हिस्से में साथ-साथ शांति से रहे हैं, और कई जगहों पर आपस में विवाह भी करते हैं। उनके बीच के संघर्ष ज़्यादातर राजनीतिक रहे हैं, जैसे हाल के दशकों की जंगें। दोनों समूह काबा की ओर रुख़ करके नमाज़ पढ़ते हैं, साथ हज करते हैं और वही क़ुरआन पढ़ते हैं। क़ुरआन ईमान वालों से कहता है कि अल्लाह की रस्सी को मज़बूती से थामो और बँटो नहीं।

क़ुरआन से

وَٱعْتَصِمُوا۟ بِحَبْلِ ٱللَّهِ جَمِيعًۭا وَلَا تَفَرَّقُوا۟ ۚ وَٱذْكُرُوا۟ نِعْمَتَ ٱللَّهِ عَلَيْكُمْ إِذْ كُنتُمْ أَعْدَآءًۭ فَأَلَّفَ بَيْنَ قُلُوبِكُمْ فَأَصْبَحْتُم بِنِعْمَتِهِۦٓ إِخْوَٰنًۭا وَكُنتُمْ عَلَىٰ شَفَا حُفْرَةٍۢ مِّنَ ٱلنَّارِ فَأَنقَذَكُم مِّنْهَا ۗ كَذَٰلِكَ يُبَيِّنُ ٱللَّهُ لَكُمْ ءَايَٰتِهِۦ لَعَلَّكُمْ تَهْتَدُونَ ﴿١٠٣﴾

और तुम सब के सब (मिलकर) ख़ुदा की रस्सी मज़बूती से थामे रहो और आपस में (एक दूसरे) के फूट न डालो और अपने हाल (ज़ार) पर ख़ुदा के एहसान को तो याद करो जब तुम आपस में (एक दूसरे के) दुश्मन थे तो ख़ुदा ने तुम्हारे दिलों में (एक दूसरे की) उलफ़त पैदा कर दी तो तुम उसके फ़ज़ल से आपस में भाई भाई हो गए और तुम गोया सुलगती हुईआग की भट्टी (दोज़ख) के लब पर (खडे) थे गिरना ही चाहते थे कि ख़ुदा ने तुमको उससे बचा लिया तो ख़ुदा अपने एहकाम यूं वाजेए करके बयान करता है ताकि तुम राहे रास्त पर आ जाओ

إِنَّمَا ٱلْمُؤْمِنُونَ إِخْوَةٌۭ فَأَصْلِحُوا۟ بَيْنَ أَخَوَيْكُمْ ۚ وَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ لَعَلَّكُمْ تُرْحَمُونَ ﴿١٠﴾

मोमिनीन तो आपस में बस भाई भाई हैं तो अपने दो भाईयों में मेल जोल करा दिया करो और ख़ुदा से डरते रहो ताकि तुम पर रहम किया जाए

إِنَّ ٱلَّذِينَ فَرَّقُوا۟ دِينَهُمْ وَكَانُوا۟ شِيَعًۭا لَّسْتَ مِنْهُمْ فِى شَىْءٍ ۚ إِنَّمَآ أَمْرُهُمْ إِلَى ٱللَّهِ ثُمَّ يُنَبِّئُهُم بِمَا كَانُوا۟ يَفْعَلُونَ ﴿١٥٩﴾

बेशक जिन लोगों ने आपने दीन में तफरक़ा डाला और कई फरीक़ बन गए थे उनसे कुछ सरोकार नहीं उनका मामला तो सिर्फ ख़ुदा के हवाले है फिर जो कुछ वह दुनिया में नेक या बद किया करते थे वह उन्हें बता देगा (उसकी रहमत तो देखो)

कृपया ध्यान दें

यह जवाब मुख्यधारा की सुन्नी समझ का अनुसरण करता है और सामान्य जानकारी है, फ़तवा नहीं। जहाँ मुसलमानों में मतभेद है, जवाब वह बता देता है। क्या आपका अपना कोई सवाल है? हमें लिखें.

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