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अल्लाह, ईसा और दूसरे धर्म

इस्लाम ईसा की माँ मरयम के बारे में क्या कहता है?

संक्षिप्त जवाब

मरयम क़ुरआन में सबसे सम्मानित औरत हैं और उसमें नाम लेकर ज़िक्र की गई एकमात्र औरत हैं। क़ुरआन उन्हें सारे जहानों की औरतों पर चुनी हुई, पाक और सच्ची कहता है, और उनकी कहानी विस्तार से बताता है।

विस्तृत जवाब

क़ुरआन का 19वाँ अध्याय मरयम के नाम पर है। वह बताता है कि फ़रिश्ते ने अल्लाह के हुक्म से उन्हें एक बच्चे की ख़ुशख़बरी दी, जबकि किसी आदमी ने उन्हें छुआ नहीं था, और कैसे उन्होंने उसे जन्म दिया और गोद के शिशु की ज़बानी उनकी सफ़ाई दी गई। मुसलमान ईसा के बिना पिता के जन्म पर ईमान रखते हैं।

क़ुरआन उन्हें सब ईमान वालों, मर्दों और औरतों, के लिए एक आदर्श के रूप में पेश करता है। उन्हें इबादतगुज़ार, दृढ़ और अपने रब की बातों की पुष्टि करने वाली बताया गया है। बहुत सी मुस्लिम लड़कियों का नाम मरयम रखा जाता है, और मुसलमान उनके बारे में कभी बुरा नहीं कहते।

क़ुरआन से

وَإِذْ قَالَتِ ٱلْمَلَٰٓئِكَةُ يَٰمَرْيَمُ إِنَّ ٱللَّهَ ٱصْطَفَىٰكِ وَطَهَّرَكِ وَٱصْطَفَىٰكِ عَلَىٰ نِسَآءِ ٱلْعَٰلَمِينَ ﴿٤٢﴾

और वह वाक़िया भी याद करो जब फ़रिश्तों ने मरियम से कहा, ऐ मरियम तुमको ख़ुदा ने बरगुज़ीदा किया और (तमाम) गुनाहों और बुराइयों से पाक साफ़ रखा और सारे दुनिया जहॉन की औरतों में से तुमको मुन्तख़िब किया है

إِذْ قَالَتِ ٱلْمَلَٰٓئِكَةُ يَٰمَرْيَمُ إِنَّ ٱللَّهَ يُبَشِّرُكِ بِكَلِمَةٍۢ مِّنْهُ ٱسْمُهُ ٱلْمَسِيحُ عِيسَى ٱبْنُ مَرْيَمَ وَجِيهًۭا فِى ٱلدُّنْيَا وَٱلْءَاخِرَةِ وَمِنَ ٱلْمُقَرَّبِينَ ﴿٤٥﴾

(वह वाक़िया भी याद करो) जब फ़रिश्तों ने (मरियम) से कहा ऐ मरियम ख़ुदा तुमको सिर्फ़ अपने हुक्म से एक लड़के के पैदा होने की खुशख़बरी देता है जिसका नाम ईसा मसीह इब्ने मरियम होगा (और) दुनिया और आखेरत (दोनों) में बाइज्ज़त (आबरू) और ख़ुदा के मुक़र्रब बन्दों में होगा

وَٱذْكُرْ فِى ٱلْكِتَٰبِ مَرْيَمَ إِذِ ٱنتَبَذَتْ مِنْ أَهْلِهَا مَكَانًۭا شَرْقِيًّۭا ﴿١٦﴾

और (ऐ रसूल) कुरान में मरियम का भी तज़किरा करो कि जब वह अपने लोगों से अलग होकर पूरब की तरफ़ वाले मकान में (गुस्ल के वास्ते) जा बैठें

وَمَرْيَمَ ٱبْنَتَ عِمْرَٰنَ ٱلَّتِىٓ أَحْصَنَتْ فَرْجَهَا فَنَفَخْنَا فِيهِ مِن رُّوحِنَا وَصَدَّقَتْ بِكَلِمَٰتِ رَبِّهَا وَكُتُبِهِۦ وَكَانَتْ مِنَ ٱلْقَٰنِتِينَ ﴿١٢﴾

और (दूसरी मिसाल) इमरान की बेटी मरियम जिसने अपनी शर्मगाह को महफूज़ रखा तो हमने उसमें रूह फूंक दी और उसने अपने परवरदिगार की बातों और उसकी किताबों की तस्दीक़ की और फरमाबरदारों में थी

कृपया ध्यान दें

यह जवाब मुख्यधारा की सुन्नी समझ का अनुसरण करता है और सामान्य जानकारी है, फ़तवा नहीं। जहाँ मुसलमानों में मतभेद है, जवाब वह बता देता है। क्या आपका अपना कोई सवाल है? हमें लिखें.

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