इस्लाम सिखाता है कि ईश्वर पूरी तरह एक है। मुसलमानों के लिए यह कहना कि ईश्वर तीन व्यक्ति है, या उसका कोई बेटा है, उसके एक होने में कमी करता है और किसी और को उसके बराबर ठहराता है।
विस्तृत जवाब
क़ुरआन ईसाइयों का अपमान नहीं करता। वह आदर के साथ उन्हें एक साझा बात पर आने को कहता है: कि हम अल्लाह के सिवा किसी की इबादत न करें। वह कहता है कि ईसा आदम की तरह अल्लाह के कलिमे से पैदा किए गए, और मरयम के बेटे मसीह केवल एक रसूल थे। क़ुरआन कहता है: 'तीन न कहो। बाज़ आ जाओ, यह तुम्हारे लिए बेहतर है।'
मुसलमान ध्यान दिलाते हैं कि ईसा ने ख़ुद सिखाया 'प्रभु हमारा परमेश्वर एक ही प्रभु है', और 'ट्रिनिटी' शब्द इंजीलों में नहीं आता। ईसाई जवाब देते हैं कि ट्रिनिटी तीन व्यक्तियों में एक ईश्वर के बारे में एक रहस्य है। मुसलमान इस मतभेद का आदर करते हैं, और उस सीधे-सादे एक होने पर क़ायम रहते हैं जो क़ुरआन सिखाता है।
ऐ अहले किताब अपने दीन में हद (एतदाल) से तजावुज़ न करो और ख़ुदा की शान में सच के सिवा (कोई दूसरी बात) न कहो मरियम के बेटे ईसा मसीह (न ख़ुदा थे न ख़ुदा के बेटे) पस ख़ुदा के एक रसूल और उसके कलमे (हुक्म) थे जिसे ख़ुदा ने मरियम के पास भेज दिया था (कि हामला हो जा) और ख़ुदा की तरफ़ से एक जान थे पस ख़ुदा और उसके रसूलों पर ईमान लाओ और तीन (ख़ुदा) के क़ायल न बनो (तसलीस से) बाज़ रहो (और) अपनी भलाई (तौहीद) का क़सद करो अल्लाह तो बस यकता माबूद है वह उस (नुक्स) से पाक व पाकीज़ा है उसका कोई लड़का हो (उसे लड़के की हाजत ही क्या है) जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है सब तो उसी का है और ख़ुदा तो कारसाज़ी में काफ़ी है
जो लोग इसके क़ायल हैं कि ख़ुदा तीन में का (तीसरा) है वह यक़ीनन काफ़िर हो गए (याद रखो कि) ख़ुदाए यकता के सिवा कोई माबूद नहीं और (ख़ुदा के बारे में) ये लोग जो कुछ बका करते हैं अगर उससे बाज़ न आए तो (समझ रखो कि) जो लोग उसमें से (काफ़िर के) काफ़िर रह गए उन पर ज़रूर दर्दनाक अज़ाब नाज़िल होगा
फिर अगर इससे भी मुंह फेरें तो (कुछ) परवाह (नहीं) ख़ुदा फ़सादी लोगों को खूब जानता है (ऐ रसूल) तुम (उनसे) कहो कि ऐ अहले किताब तुम ऐसी (ठिकाने की) बात पर तो आओ जो हमारे और तुम्हारे दरमियान यकसॉ है कि खुदा के सिवा किसी की इबादत न करें और किसी चीज़ को उसका शरीक न बनाएं और ख़ुदा के सिवा हममें से कोई किसी को अपना परवरदिगार न बनाए अगर इससे भी मुंह मोडें तो तुम गवाह रहना हम (ख़ुदा के) फ़रमाबरदार हैं
यह जवाब मुख्यधारा की सुन्नी समझ का अनुसरण करता है और सामान्य जानकारी है, फ़तवा नहीं। जहाँ मुसलमानों में मतभेद है, जवाब वह बता देता है। क्या आपका अपना कोई सवाल है? हमें लिखें.