لَآ أُقْسِمُ بِهَٰذَا ٱلْبَلَدِ ﴿١﴾
मुझे इस शहर (मक्का) की कसम
क़ुरआन की 90वीं सूरत
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
لَآ أُقْسِمُ بِهَٰذَا ٱلْبَلَدِ ﴿١﴾
मुझे इस शहर (मक्का) की कसम
وَأَنتَ حِلٌّۢ بِهَٰذَا ٱلْبَلَدِ ﴿٢﴾
और तुम इसी शहर में तो रहते हो
وَوَالِدٍۢ وَمَا وَلَدَ ﴿٣﴾
और (तुम्हारे) बाप (आदम) और उसकी औलाद की क़सम
لَقَدْ خَلَقْنَا ٱلْإِنسَٰنَ فِى كَبَدٍ ﴿٤﴾
हमने इन्सान को मशक्क़त में (रहने वाला) पैदा किया है
أَيَحْسَبُ أَن لَّن يَقْدِرَ عَلَيْهِ أَحَدٌۭ ﴿٥﴾
क्या वह ये समझता है कि उस पर कोई काबू न पा सकेगा
يَقُولُ أَهْلَكْتُ مَالًۭا لُّبَدًا ﴿٦﴾
वह कहता है कि मैने अलग़ारों माल उड़ा दिया
أَيَحْسَبُ أَن لَّمْ يَرَهُۥٓ أَحَدٌ ﴿٧﴾
क्या वह ये ख्याल रखता है कि उसको किसी ने देखा ही नहीं
أَلَمْ نَجْعَل لَّهُۥ عَيْنَيْنِ ﴿٨﴾
क्या हमने उसे दोनों ऑंखें और ज़बान
وَلِسَانًۭا وَشَفَتَيْنِ ﴿٩﴾
और दोनों लब नहीं दिए (ज़रूर दिए)
وَهَدَيْنَٰهُ ٱلنَّجْدَيْنِ ﴿١٠﴾
और उसको (अच्छी बुरी) दोनों राहें भी दिखा दीं
فَلَا ٱقْتَحَمَ ٱلْعَقَبَةَ ﴿١١﴾
फिर वह घाटी पर से होकर (क्यों) नहीं गुज़रा
وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا ٱلْعَقَبَةُ ﴿١٢﴾
और तुमको क्या मालूम कि घाटी क्या है
فَكُّ رَقَبَةٍ ﴿١٣﴾
किसी (की) गर्दन का (गुलामी या कर्ज से) छुड़ाना
أَوْ إِطْعَٰمٌۭ فِى يَوْمٍۢ ذِى مَسْغَبَةٍۢ ﴿١٤﴾
या भूख के दिन रिश्तेदार यतीम या ख़ाकसार
يَتِيمًۭا ذَا مَقْرَبَةٍ ﴿١٥﴾
मोहताज को
أَوْ مِسْكِينًۭا ذَا مَتْرَبَةٍۢ ﴿١٦﴾
खाना खिलाना
ثُمَّ كَانَ مِنَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَتَوَاصَوْا۟ بِٱلصَّبْرِ وَتَوَاصَوْا۟ بِٱلْمَرْحَمَةِ ﴿١٧﴾
फिर तो उन लोगों में (शामिल) हो जाता जो ईमान लाए और सब्र की नसीहत और तरस खाने की वसीयत करते रहे
أُو۟لَٰٓئِكَ أَصْحَٰبُ ٱلْمَيْمَنَةِ ﴿١٨﴾
यही लोग ख़ुश नसीब हैं
وَٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ بِـَٔايَٰتِنَا هُمْ أَصْحَٰبُ ٱلْمَشْـَٔمَةِ ﴿١٩﴾
और जिन लोगों ने हमारी आयतों से इन्कार किया है यही लोग बदबख्त हैं
عَلَيْهِمْ نَارٌۭ مُّؤْصَدَةٌۢ ﴿٢٠﴾
कि उनको आग में डाल कर हर तरफ से बन्द कर दिया जाएगा
अरबी पाठ: उस्मानी लिपि। अनुवाद: Suhel Farooq Khan and Saifur Rahman Nadwi। ऑडियो: everyayah.com।
सूरह Al-Balad (البلد) क़ुरआन की 90वीं सूरत है। इसमें 20 आयतें हैं और यह पारा 30 में है। इसे मक्की सूरत माना जाता है, यानी यह मुख्यतः नबी ﷺ की मदीना हिजरत से पहले उतरी।
इसका नाम, البلد, अरबी में इस सूरत की पहचान है।
सूरह Al-Balad में 20 आयतें हैं।
वर्गीकरण: मक्की।
सूरह Al-Balad पारा 30 में है।
इसे आयत-दर-आयत सुनने के लिए इस पन्ने पर प्ले दबाएँ, क़ारी: मिशारी अल-अफ़ासी, महमूद ख़लील अल-हुसरी, अब्दुल बासित अब्दुस-समद, अब्दुर्रहमान अस-सुदैस, माहिर अल-मुऐक़िली, साद अल-ग़ामिदी, अहमद अल-अजमी, अबू बक्र अश-शातरी, हानी अर-रिफ़ाई, मुहम्मद सिद्दीक़ अल-मिंशावी, अली अल-हुज़ैफ़ी, मुहम्मद अय्यूब, अब्दुल्लाह बसफ़र, यासिर अद-दौसरी, नासिर अल-क़तामी, सलाह अल-बुदैर, सऊद अश-शुरैम, अब्दुल्लाह अवाद अल-जुहनी, मुहम्मद जिब्रील।