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नमाज़, रोज़ा, हज और इबादत

ईद-उल-फ़ित्र और ईद-उल-अज़हा क्या हैं?

संक्षिप्त जवाब

ईद-उल-फ़ित्र और ईद-उल-अज़हा इस्लाम के दो सालाना त्योहार हैं। ईद-उल-फ़ित्र रमज़ान के अंत को मनाती है, और ईद-उल-अज़हा हज के अंत में आती है और नबी इब्राहीम के अल्लाह के लिए अपने बेटे की क़ुर्बानी देने की तैयारी को याद करती है।

विस्तृत जवाब

दोनों ईदों पर मुसलमान अपने सबसे अच्छे कपड़े पहनते हैं, सुबह एक ख़ास सामूहिक नमाज़ पढ़ते हैं, दान देते हैं, परिवार और दोस्तों से मिलते हैं और खाना बाँटते हैं। ईद-उल-फ़ित्र की शुरुआत ग़रीबों को दिए जाने वाले दान (ज़कात-उल-फ़ित्र) से होती है ताकि हर कोई जश्न में शामिल हो सके।

ईद-उल-अज़हा पर जो मुसलमान सक्षम हैं वे भेड़, बकरी, गाय या ऊँट की क़ुर्बानी देते हैं, और गोश्त के तीन हिस्से करते हैं: परिवार के लिए, रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए और ग़रीबों के लिए। यह याद दिलाता है कि जब इब्राहीम ने अपनी आज्ञाकारिता दिखा दी तो अल्लाह ने उनके बेटे की जगह एक मेंढ़ा दे दिया।

क़ुरआन से

فَلَمَّا بَلَغَ مَعَهُ ٱلسَّعْىَ قَالَ يَٰبُنَىَّ إِنِّىٓ أَرَىٰ فِى ٱلْمَنَامِ أَنِّىٓ أَذْبَحُكَ فَٱنظُرْ مَاذَا تَرَىٰ ۚ قَالَ يَٰٓأَبَتِ ٱفْعَلْ مَا تُؤْمَرُ ۖ سَتَجِدُنِىٓ إِن شَآءَ ٱللَّهُ مِنَ ٱلصَّٰبِرِينَ ﴿١٠٢﴾

फिर जब इस्माईल अपने बाप के साथ दौड़ धूप करने लगा तो (एक दफा) इबराहीम ने कहा बेटा खूब मैं (वही के ज़रिये क्या) देखता हूँ कि मैं तो खुद तुम्हें ज़िबाह कर रहा हूँ तो तुम भी ग़ौर करो तुम्हारी इसमें क्या राय है इसमाईल ने कहा अब्बा जान जो आपको हुक्म हुआ है उसको (बे तअम्मुल) कीजिए अगर खुदा ने चाहा तो मुझे आप सब्र करने वालों में से पाएगे

وَفَدَيْنَٰهُ بِذِبْحٍ عَظِيمٍۢ ﴿١٠٧﴾

और हमने इस्माईल का फ़िदया एक ज़िबाहे अज़ीम (बड़ी कुर्बानी) क़रार दिया

कृपया ध्यान दें

यह जवाब मुख्यधारा की सुन्नी समझ का अनुसरण करता है और सामान्य जानकारी है, फ़तवा नहीं। जहाँ मुसलमानों में मतभेद है, जवाब वह बता देता है। क्या आपका अपना कोई सवाल है? हमें लिखें.

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