बिना सूअर के मांस, सूअर से बने उत्पादों (जैसे जिलेटिन और चर्बी) या शराब के खाना परोसें, खाना पकाने में भी। मांस बेहतर हो कि हलाल हो, यानी ऐसे जानवर का जिसे इस्लामी तरीक़े से ज़बह किया गया हो। अगर यह संभव न हो, तो शाकाहारी, मछली और समुद्री भोजन के व्यंजन सुरक्षित चुनाव हैं।
विस्तृत जवाब
मछली और समुद्री भोजन, अंडे, डेयरी, फल, सब्ज़ियाँ और रोटी हलाल हैं। शाकाहारी व्यंजन एक आसान विकल्प हैं। जिलेटिन, चर्बी, जानवर के रेनेट और शराब-आधारित फ़्लेवरिंग के लिए लेबल जाँचें। अपने मेहमानों को बताएँ कि व्यंजन में क्या है, और वे जो नहीं खा सकते उससे ख़ुशी से बच लेंगे।
कुछ मुसलमान अहले-किताब (ईसाइयों और यहूदियों) का मांस खाते हैं जब वह सही तरीक़े से ज़बह किया गया हो, और कुछ कोई ऐसा मांस नहीं खाते जो हलाल-प्रमाणित न हो। मेहमान से पूछ लेना अच्छा है। चाय, खजूर और मिठाई पेश करना मेहमाननवाज़ी की अच्छी निशानी है: पैग़ंबर ﷺ ने मेहमान का सम्मान करना सिखाया।
(लोगों) मरा हुआ जानवर और ख़ून और सुअर का गोश्त और जिस (जानवर) पर (ज़िबाह) के वक्त ख़ुदा के सिवा किसी दूसरे का नाम लिया जाए और गर्दन मरोड़ा हुआ और चोट खाकर मरा हुआ और जो कुएं (वगैरह) में गिरकर मर जाए और जो सींग से मार डाला गया हो और जिसको दरिन्दे ने फाड़ खाया हो मगर जिसे तुमने मरने के क़ब्ल ज़िबाह कर लो और (जो जानवर) बुतों (के थान) पर चढ़ा कर ज़िबाह किया जाए और जिसे तुम (पाँसे) के तीरों से बाहम हिस्सा बॉटो (ग़रज़ यह सब चीज़ें) तुम पर हराम की गयी हैं ये गुनाह की बात है (मुसलमानों) अब तो कुफ्फ़ार तुम्हारे दीन से (फिर जाने से) मायूस हो गए तो तुम उनसे तो डरो ही नहीं बल्कि सिर्फ मुझी से डरो आज मैंने तुम्हारे दीन को कामिल कर दिया और तुमपर अपनी नेअमत पूरी कर दी और तुम्हारे (इस) दीने इस्लाम को पसन्द किया पस जो शख्स भूख़ में मजबूर हो जाए और गुनाह की तरफ़ माएल भी न हो (और कोई चीज़ खा ले) तो ख़ुदा बेशक बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
आज तमाम पाकीज़ा चीजें तुम्हारे लिए हलाल कर दी गयी हैं और अहले किताब की ख़ुश्क चीजें ग़ेहूं (वगैरह) तुम्हारे लिए हलाल हैं और तुम्हारी ख़ुश्क चीजें ग़ेहूं (वगैरह) उनके लिए हलाल हैं और आज़ाद पाक दामन औरतें और उन लोगों में की आज़ाद पाक दामन औरतें जिनको तुमसे पहले किताब दी जा चुकी है जब तुम उनको उनके मेहर दे दो (और) पाक दामिनी का इरादा करो न तो खुल्लम खुल्ला ज़िनाकारी का और न चोरी छिपे से आशनाई का और जिस शख्स ने ईमान से इन्कार किया तो उसका सब किया (धरा) अकारत हो गया और (तुल्फ़ तो ये है कि) आख़ेरत में भी वही घाटे में रहेगा
यह जवाब मुख्यधारा की सुन्नी समझ का अनुसरण करता है और सामान्य जानकारी है, फ़तवा नहीं। जहाँ मुसलमानों में मतभेद है, जवाब वह बता देता है। क्या आपका अपना कोई सवाल है? हमें लिखें.