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मुसलमानों के साथ रहना और काम करना

अगर कोई मुसलमान सहकर्मी या पड़ोसी पूर्वाग्रह का सामना करे तो मैं कैसे मदद कर सकता हूँ?

संक्षिप्त जवाब

जब आप रूढ़ियाँ सुनें तो शिष्टता से बोलें, उस इंसान का हाल पूछें और सुनें। मुसलमानों के लिखे स्रोतों से सीखें और आदर के साथ सवाल पूछें। समर्थन का एक सादा काम उस इंसान के लिए बहुत मायने रख सकता है जिसे निशाना बनाया जाता है।

विस्तृत जवाब

कई देशों में बहुत से मुसलमान शक, अपमान और भेदभाव का सामना करते हैं, और स्कार्फ़ पहनने वाली औरतें अक्सर निशाना बनती हैं। अगर आप उत्पीड़न देखें, तो उस इंसान के साथ खड़े हों, सताने वाले से बहस न करें बल्कि उस इंसान को वहाँ से निकलने में मदद करें और, ज़रूरत हो तो, रिपोर्ट करें। किसी भी मुसलमान को सब मुसलमानों का प्रवक्ता न समझें।

क़ुरआन मुसलमानों से कहता है कि उनसे भी इंसाफ़ करो जो उन्हें नापसंद करते हैं, और इस्लाम इंसाफ़ के लिए खड़े होने वालों का मूल्य सिखाता है। साथ खाना खाना, मस्जिद के खुले दिन में जाना और अपने मुस्लिम पड़ोसियों को जानना डर के सबसे अच्छे इलाजों में से हैं।

क़ुरआन से

يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ كُونُوا۟ قَوَّٰمِينَ لِلَّهِ شُهَدَآءَ بِٱلْقِسْطِ ۖ وَلَا يَجْرِمَنَّكُمْ شَنَـَٔانُ قَوْمٍ عَلَىٰٓ أَلَّا تَعْدِلُوا۟ ۚ ٱعْدِلُوا۟ هُوَ أَقْرَبُ لِلتَّقْوَىٰ ۖ وَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ خَبِيرٌۢ بِمَا تَعْمَلُونَ ﴿٨﴾

ऐ ईमानदारों ख़ुदा (की ख़ुशनूदी) के लिए इन्साफ़ के साथ गवाही देने के लिए तैयार रहो और तुम्हें किसी क़बीले की अदावत इस जुर्म में न फॅसवा दे कि तुम नाइन्साफी करने लगो (ख़बरदार बल्कि) तुम (हर हाल में) इन्साफ़ करो यही परहेज़गारी से बहुत क़रीब है और ख़ुदा से डरो क्योंकि जो कुछ तुम करते हो (अच्छा या बुरा) ख़ुदा उसे ज़रूर जानता है

يَٰٓأَيُّهَا ٱلنَّاسُ إِنَّا خَلَقْنَٰكُم مِّن ذَكَرٍۢ وَأُنثَىٰ وَجَعَلْنَٰكُمْ شُعُوبًۭا وَقَبَآئِلَ لِتَعَارَفُوٓا۟ ۚ إِنَّ أَكْرَمَكُمْ عِندَ ٱللَّهِ أَتْقَىٰكُمْ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ عَلِيمٌ خَبِيرٌۭ ﴿١٣﴾

लोगों हमने तो तुम सबको एक मर्द और एक औरत से पैदा किया और हम ही ने तुम्हारे कबीले और बिरादरियाँ बनायीं ताकि एक दूसरे की शिनाख्त करे इसमें शक़ नहीं कि ख़ुदा के नज़दीक तुम सबमें बड़ा इज्ज़तदार वही है जो बड़ा परहेज़गार हो बेशक ख़ुदा बड़ा वाक़िफ़कार ख़बरदार है

कृपया ध्यान दें

यह जवाब मुख्यधारा की सुन्नी समझ का अनुसरण करता है और सामान्य जानकारी है, फ़तवा नहीं। जहाँ मुसलमानों में मतभेद है, जवाब वह बता देता है। क्या आपका अपना कोई सवाल है? हमें लिखें.

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