यूरोप, उत्तरी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में करोड़ों मुसलमान रहते हैं, बहुत से वहीं पैदा हुए नागरिक के रूप में। वे हर पेशे में काम करते हैं, स्थानीय स्कूलों में पढ़ते हैं, सार्वजनिक जीवन में हिस्सा लेते हैं और साथ ही मस्जिदों, हलाल खाने और इस्लामी स्कूलों के साथ अपना ईमान बनाए रखते हैं।
विस्तृत जवाब
इस्लामी शिक्षा मुसलमानों से कहती है कि जहाँ भी रहें अच्छे पड़ोसी बनें, अपने वादे निभाएँ और समाज के लिए उपयोगी हों। क़ुरआन कहता है कि जो तुम्हारे दीन की वजह से तुमसे नहीं लड़ते उनके साथ भलाई और इंसाफ़ का बर्ताव करो। मुस्लिम डॉक्टर, शिक्षक, सैनिक, क़ानून निर्माता और खिलाड़ी पश्चिमी देशों में सेवा करते हैं।
मुस्लिम समुदाय कठिनाइयों का भी सामना करते हैं: भेदभाव, नफ़रत के अपराध, और पहनावे और घुल-मिलने पर बहसें। सर्वेक्षण दिखाते हैं कि पश्चिम के मुसलमान आम तौर पर औसत नागरिक से ज़्यादा धार्मिक हैं और यह भी कहते हैं कि वे अपने देश के प्रति वफ़ादारी महसूस करते हैं। बहुत से मुस्लिम संगठन दान, अंतरधार्मिक संवाद और स्थानीय सेवा पर काम करते हैं।
जो लोग तुमसे तुम्हारे दीन के बारे में नहीं लड़े भिड़े और न तुम्हें घरों से निकाले उन लोगों के साथ एहसान करने और उनके साथ इन्साफ़ से पेश आने से ख़ुदा तुम्हें मना नहीं करता बेशक ख़ुदा इन्साफ़ करने वालों को दोस्त रखता है
ऐ ईमानदारों ख़ुदा (की ख़ुशनूदी) के लिए इन्साफ़ के साथ गवाही देने के लिए तैयार रहो और तुम्हें किसी क़बीले की अदावत इस जुर्म में न फॅसवा दे कि तुम नाइन्साफी करने लगो (ख़बरदार बल्कि) तुम (हर हाल में) इन्साफ़ करो यही परहेज़गारी से बहुत क़रीब है और ख़ुदा से डरो क्योंकि जो कुछ तुम करते हो (अच्छा या बुरा) ख़ुदा उसे ज़रूर जानता है
यह जवाब मुख्यधारा की सुन्नी समझ का अनुसरण करता है और सामान्य जानकारी है, फ़तवा नहीं। जहाँ मुसलमानों में मतभेद है, जवाब वह बता देता है। क्या आपका अपना कोई सवाल है? हमें लिखें.