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क़ुरआन की 96वीं सूरत

सूरह Al-'Alaq

मक्की 19 आयतें पारा 30

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

ٱقْرَأْ بِٱسْمِ رَبِّكَ ٱلَّذِى خَلَقَ ﴿١﴾

(ऐ रसूल) अपने परवरदिगार का नाम लेकर पढ़ो जिसने हर (चीज़ को) पैदा किया

خَلَقَ ٱلْإِنسَٰنَ مِنْ عَلَقٍ ﴿٢﴾

उस ने इन्सान को जमे हुए ख़ून से पैदा किया पढ़ो

ٱقْرَأْ وَرَبُّكَ ٱلْأَكْرَمُ ﴿٣﴾

और तुम्हारा परवरदिगार बड़ा क़रीम है

ٱلَّذِى عَلَّمَ بِٱلْقَلَمِ ﴿٤﴾

जिसने क़लम के ज़रिए तालीम दी

عَلَّمَ ٱلْإِنسَٰنَ مَا لَمْ يَعْلَمْ ﴿٥﴾

उसीने इन्सान को वह बातें बतायीं जिनको वह कुछ जानता ही न था

كَلَّآ إِنَّ ٱلْإِنسَٰنَ لَيَطْغَىٰٓ ﴿٦﴾

सुन रखो बेशक इन्सान जो अपने को ग़नी देखता है

أَن رَّءَاهُ ٱسْتَغْنَىٰٓ ﴿٧﴾

तो सरकश हो जाता है

إِنَّ إِلَىٰ رَبِّكَ ٱلرُّجْعَىٰٓ ﴿٨﴾

बेशक तुम्हारे परवरदिगार की तरफ (सबको) पलटना है

أَرَءَيْتَ ٱلَّذِى يَنْهَىٰ ﴿٩﴾

भला तुमने उस शख़्श को भी देखा

عَبْدًا إِذَا صَلَّىٰٓ ﴿١٠﴾

जो एक बन्दे को जब वह नमाज़ पढ़ता है तो वह रोकता है

أَرَءَيْتَ إِن كَانَ عَلَى ٱلْهُدَىٰٓ ﴿١١﴾

भला देखो तो कि अगर ये राहे रास्त पर हो या परहेज़गारी का हुक्म करे

أَوْ أَمَرَ بِٱلتَّقْوَىٰٓ ﴿١٢﴾

(तो रोकना कैसा)

أَرَءَيْتَ إِن كَذَّبَ وَتَوَلَّىٰٓ ﴿١٣﴾

भला देखो तो कि अगर उसने (सच्चे को) झुठला दिया और (उसने) मुँह फेरा

أَلَمْ يَعْلَم بِأَنَّ ٱللَّهَ يَرَىٰ ﴿١٤﴾

(तो नतीजा क्या होगा) क्या उसको ये मालूम नहीं कि ख़ुदा यक़ीनन देख रहा है

كَلَّا لَئِن لَّمْ يَنتَهِ لَنَسْفَعًۢا بِٱلنَّاصِيَةِ ﴿١٥﴾

देखो अगर वह बाज़ न आएगा तो हम परेशानी के पट्टे पकड़ के घसीटेंगे

نَاصِيَةٍۢ كَٰذِبَةٍ خَاطِئَةٍۢ ﴿١٦﴾

झूठे ख़तावार की पेशानी के पट्टे

فَلْيَدْعُ نَادِيَهُۥ ﴿١٧﴾

तो वह अपने याराने जलसा को बुलाए हम भी जल्लाद फ़रिश्ते को बुलाएँगे

سَنَدْعُ ٱلزَّبَانِيَةَ ﴿١٨﴾

(ऐ रसूल) देखो हरगिज़ उनका कहना न मानना

96:19 सज्दे की आयत

كَلَّا لَا تُطِعْهُ وَٱسْجُدْ وَٱقْتَرِب ۩ ﴿١٩﴾

और सजदे करते रहो और कुर्ब हासिल करो (19) (सजदा)

Al-'Alaq 19 में से आयत 1

अरबी पाठ: उस्मानी लिपि। अनुवाद: Suhel Farooq Khan and Saifur Rahman Nadwi। ऑडियो: everyayah.com।

सूरह Al-'Alaq के बारे में

सूरह Al-'Alaq (العلق) क़ुरआन की 96वीं सूरत है। इसमें 19 आयतें हैं और यह पारा 30 में है। इसे मक्की सूरत माना जाता है, यानी यह मुख्यतः नबी ﷺ की मदीना हिजरत से पहले उतरी।

इसका नाम, العلق, अरबी में इस सूरत की पहचान है।

सूरह Al-'Alaq के बारे में प्रश्न

सूरह Al-'Alaq में कितनी आयतें हैं?

सूरह Al-'Alaq में 19 आयतें हैं।

सूरह Al-'Alaq मक्की है या मदनी?

वर्गीकरण: मक्की।

सूरह Al-'Alaq किस पारे में है?

सूरह Al-'Alaq पारा 30 में है।

मैं सूरह Al-'Alaq कहाँ सुन सकता हूँ?

इसे आयत-दर-आयत सुनने के लिए इस पन्ने पर प्ले दबाएँ, क़ारी: मिशारी अल-अफ़ासी, महमूद ख़लील अल-हुसरी, अब्दुल बासित अब्दुस-समद, अब्दुर्रहमान अस-सुदैस, माहिर अल-मुऐक़िली, साद अल-ग़ामिदी, अहमद अल-अजमी, अबू बक्र अश-शातरी, हानी अर-रिफ़ाई, मुहम्मद सिद्दीक़ अल-मिंशावी, अली अल-हुज़ैफ़ी, मुहम्मद अय्यूब, अब्दुल्लाह बसफ़र, यासिर अद-दौसरी, नासिर अल-क़तामी, सलाह अल-बुदैर, सऊद अश-शुरैम, अब्दुल्लाह अवाद अल-जुहनी, मुहम्मद जिब्रील।

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