بِّسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ إِنَّآ أَنزَلْنَٰهُ فِى لَيْلَةِ ٱلْقَدْرِ ﴿١﴾
हमने (इस कुरान) को शबे क़द्र में नाज़िल (करना शुरू) किया
क़ुरआन की 97वीं सूरत
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
بِّسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ إِنَّآ أَنزَلْنَٰهُ فِى لَيْلَةِ ٱلْقَدْرِ ﴿١﴾
हमने (इस कुरान) को शबे क़द्र में नाज़िल (करना शुरू) किया
وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا لَيْلَةُ ٱلْقَدْرِ ﴿٢﴾
और तुमको क्या मालूम शबे क़द्र क्या है
لَيْلَةُ ٱلْقَدْرِ خَيْرٌۭ مِّنْ أَلْفِ شَهْرٍۢ ﴿٣﴾
शबे क़द्र (मरतबा और अमल में) हज़ार महीनो से बेहतर है
تَنَزَّلُ ٱلْمَلَٰٓئِكَةُ وَٱلرُّوحُ فِيهَا بِإِذْنِ رَبِّهِم مِّن كُلِّ أَمْرٍۢ ﴿٤﴾
इस (रात) में फ़रिश्ते और जिबरील (साल भर की) हर बात का हुक्म लेकर अपने परवरदिगार के हुक्म से नाज़िल होते हैं
سَلَٰمٌ هِىَ حَتَّىٰ مَطْلَعِ ٱلْفَجْرِ ﴿٥﴾
ये रात सुबह के तुलूअ होने तक (अज़सरतापा) सलामती है
अरबी पाठ: उस्मानी लिपि। अनुवाद: Suhel Farooq Khan and Saifur Rahman Nadwi। ऑडियो: everyayah.com।
सूरह Al-Qadr (القدر) क़ुरआन की 97वीं सूरत है। इसमें 5 आयतें हैं और यह पारा 30 में है। इसे मक्की सूरत माना जाता है, यानी यह मुख्यतः नबी ﷺ की मदीना हिजरत से पहले उतरी।
इसका नाम, القدر, अरबी में इस सूरत की पहचान है।
सूरह Al-Qadr में 5 आयतें हैं।
वर्गीकरण: मक्की।
सूरह Al-Qadr पारा 30 में है।
इसे आयत-दर-आयत सुनने के लिए इस पन्ने पर प्ले दबाएँ, क़ारी: मिशारी अल-अफ़ासी, महमूद ख़लील अल-हुसरी, अब्दुल बासित अब्दुस-समद, अब्दुर्रहमान अस-सुदैस, माहिर अल-मुऐक़िली, साद अल-ग़ामिदी, अहमद अल-अजमी, अबू बक्र अश-शातरी, हानी अर-रिफ़ाई, मुहम्मद सिद्दीक़ अल-मिंशावी, अली अल-हुज़ैफ़ी, मुहम्मद अय्यूब, अब्दुल्लाह बसफ़र, यासिर अद-दौसरी, नासिर अल-क़तामी, सलाह अल-बुदैर, सऊद अश-शुरैम, अब्दुल्लाह अवाद अल-जुहनी, मुहम्मद जिब्रील।