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क़ुरआन और पैग़ंबर

मुसलमान कैसे जानते हैं कि मुहम्मद ﷺ सच्चे नबी थे?

संक्षिप्त जवाब

मुसलमान ख़ुद क़ुरआन की ओर, अपनी मिशन से पहले और बाद के उनके चरित्र और ईमानदारी की ओर, इस प्रक्रिया में उन्होंने क्या पाया और क्या छोड़ा इसकी ओर, और इस बात की ओर इशारा करते हैं कि उनका संदेश एक अल्लाह की वही पुकार था जो हर पहले नबी ने दी।

विस्तृत जवाब

वे न पढ़ सकते थे न लिख सकते थे, फिर भी वे ऐसी किताब लाए जिसकी बराबरी अरब कवि, जो भाषा के उस्ताद थे, चुनौती दिए जाने पर एक अध्याय की भी न कर सके। वह्य से पहले उनकी अपनी क़ौम उन्हें अमीन कहती थी। उन्होंने दौलत या ओहदा नहीं चाहा: वे सादगी से रहे, अपने कपड़े ख़ुद सिलते थे, और जब उनकी वफ़ात हुई तो पीछे लगभग कुछ नहीं छोड़ा।

उनके सबसे क़रीबी लोग, उनकी पत्नी, उनके चचेरे भाई और उनके दोस्त अबू बक्र, सबसे पहले ईमान लाए, और वे उन्हें किसी भी दूसरे से बेहतर जानते थे। उनके अनुयायियों ने उनके संदेश की ख़ातिर सालों तक ज़ुल्म सहा। मुसलमान उस चमत्कार को भी देखते हैं कि बँटे हुए रेगिस्तानी इलाक़े के लोगों का एक छोटा समूह उनकी शिक्षा से कितनी तेज़ी से बदल गया।

क़ुरआन से

وَإِن كُنتُمْ فِى رَيْبٍۢ مِّمَّا نَزَّلْنَا عَلَىٰ عَبْدِنَا فَأْتُوا۟ بِسُورَةٍۢ مِّن مِّثْلِهِۦ وَٱدْعُوا۟ شُهَدَآءَكُم مِّن دُونِ ٱللَّهِ إِن كُنتُمْ صَٰدِقِينَ ﴿٢٣﴾

और अगर तुम लोग इस कलाम से जो हमने अपने बन्दे (मोहम्मद) पर नाज़िल किया है शक में पड़े हो पस अगर तुम सच्चे हो तो तुम (भी) एक सूरा बना लाओ और खुदा के सिवा जो भी तुम्हारे मददगार हों उनको भी बुला लो

قُل لَّئِنِ ٱجْتَمَعَتِ ٱلْإِنسُ وَٱلْجِنُّ عَلَىٰٓ أَن يَأْتُوا۟ بِمِثْلِ هَٰذَا ٱلْقُرْءَانِ لَا يَأْتُونَ بِمِثْلِهِۦ وَلَوْ كَانَ بَعْضُهُمْ لِبَعْضٍۢ ظَهِيرًۭا ﴿٨٨﴾

(ऐ रसूल) तुम कह दो कि (अगर सारे दुनिया जहाँन के) आदमी और जिन इस बात पर इकट्ठे हो कि उस क़ुरान का मिसल ले आएँ तो (ना मुमकिन) उसके बराबर नहीं ला सकते अगरचे (उसको कोशिश में) एक का एक मददगार भी बने

وَمَا كُنتَ تَتْلُوا۟ مِن قَبْلِهِۦ مِن كِتَٰبٍۢ وَلَا تَخُطُّهُۥ بِيَمِينِكَ ۖ إِذًۭا لَّٱرْتَابَ ٱلْمُبْطِلُونَ ﴿٤٨﴾

और (ऐ रसूल) क़ुरान से पहले न तो तुम कोई किताब ही पढ़ते थे और न अपने हाथ से तुम लिखा करते थे ऐसा होता तो ये झूठे ज़रुर (तुम्हारी नबुवत में) शक करते

कृपया ध्यान दें

यह जवाब मुख्यधारा की सुन्नी समझ का अनुसरण करता है और सामान्य जानकारी है, फ़तवा नहीं। जहाँ मुसलमानों में मतभेद है, जवाब वह बता देता है। क्या आपका अपना कोई सवाल है? हमें लिखें.

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