तीनों एक ईश्वर में विश्वास रखते हैं और अपनी आस्था की जड़ इब्राहीम तक ले जाते हैं, इसलिए इन्हें इब्राहीमी धर्म कहा जाता है। इस्लाम ईसाइयत से मुख्य रूप से इस बात में अलग है कि वह त्रिदेववाद (ट्रिनिटी) को नहीं मानता और न यह मानता है कि ईसा ईश्वर या ईश्वर के बेटे हैं, और यहूदियत से इस बात में कि वह ईसा और मुहम्मद ﷺ को नबी मानता है।
विस्तृत जवाब
मुसलमान मूसा, ईसा और पहले के नबियों का आदर करते हैं और मानते हैं कि सबने एक ही पुकार दी: केवल अल्लाह की इबादत करो। मुसलमान मानते हैं कि पहले की किताबें अल्लाह की ओर से उतारी गई थीं, लेकिन समय के साथ लोगों ने उनके कुछ हिस्से बदल दिए, इसलिए क़ुरआन आया ताकि जो सच था उसकी पुष्टि करे और जो बदल दिया गया था उसे सही करे।
व्यवहार में बहुत से साझा मूल्य और समानताएँ भी हैं: नमाज़, दान, रोज़ा, हया, सूअर का मांस और ब्याज की मनाही, और फ़रिश्तों, हिसाब-किताब और आख़िरत में विश्वास। क़ुरआन यहूदियों और ईसाइयों को 'अहले-किताब' (किताब वाले) कहता है और मुसलमानों को उनका खाना खाने और उनकी पाकदामन औरतों से विवाह करने की इजाज़त देता है।
फिर अगर इससे भी मुंह फेरें तो (कुछ) परवाह (नहीं) ख़ुदा फ़सादी लोगों को खूब जानता है (ऐ रसूल) तुम (उनसे) कहो कि ऐ अहले किताब तुम ऐसी (ठिकाने की) बात पर तो आओ जो हमारे और तुम्हारे दरमियान यकसॉ है कि खुदा के सिवा किसी की इबादत न करें और किसी चीज़ को उसका शरीक न बनाएं और ख़ुदा के सिवा हममें से कोई किसी को अपना परवरदिगार न बनाए अगर इससे भी मुंह मोडें तो तुम गवाह रहना हम (ख़ुदा के) फ़रमाबरदार हैं
आज तमाम पाकीज़ा चीजें तुम्हारे लिए हलाल कर दी गयी हैं और अहले किताब की ख़ुश्क चीजें ग़ेहूं (वगैरह) तुम्हारे लिए हलाल हैं और तुम्हारी ख़ुश्क चीजें ग़ेहूं (वगैरह) उनके लिए हलाल हैं और आज़ाद पाक दामन औरतें और उन लोगों में की आज़ाद पाक दामन औरतें जिनको तुमसे पहले किताब दी जा चुकी है जब तुम उनको उनके मेहर दे दो (और) पाक दामिनी का इरादा करो न तो खुल्लम खुल्ला ज़िनाकारी का और न चोरी छिपे से आशनाई का और जिस शख्स ने ईमान से इन्कार किया तो उसका सब किया (धरा) अकारत हो गया और (तुल्फ़ तो ये है कि) आख़ेरत में भी वही घाटे में रहेगा
यह जवाब मुख्यधारा की सुन्नी समझ का अनुसरण करता है और सामान्य जानकारी है, फ़तवा नहीं। जहाँ मुसलमानों में मतभेद है, जवाब वह बता देता है। क्या आपका अपना कोई सवाल है? हमें लिखें.