जी हाँ। क़ुरआन आदम और उनकी पत्नी (परंपरा में हव्वा नाम) की कहानी बताता है, जिन्हें जन्नत में रखा गया और जिन्होंने शैतान की बात सुनकर ग़लती की, फिर तौबा की और माफ़ किए गए। मुसलमान अकेले हव्वा को दोषी नहीं ठहराते और न मूल पाप में विश्वास करते हैं।
विस्तृत जवाब
क़ुरआन में दोनों को बहकाया गया, और दोनों से ग़लती हुई। फिर आदम को अपने रब से कुछ कलिमात मिले और उन्होंने तौबा की, और अल्लाह ने उन्हें माफ़ किया और चुन लिया। इसलिए इंसान गुनाहगार पैदा नहीं होते: हर इंसान ईमान की स्वाभाविक अवस्था (फ़ितरत) में पैदा होता है और अपने कामों का ख़ुद ज़िम्मेदार है।
आदम इस्लाम में पहले नबी भी हैं, और सारे इंसान उनकी संतान हैं। इसीलिए इस्लाम इंसानी परिवार की बराबरी और एकता पर ज़ोर देता है। यह कहानी यह भी सिखाती है कि तौबा का दरवाज़ा हर किसी के लिए खुला है।
और हमने आदम से कहा ऐ आदम तुम अपनी बीवी समैत बेहिश्त में रहा सहा करो और जहाँ से तुम्हारा जी चाहे उसमें से ब फराग़त खाओ (पियो) मगर उस दरख्त के पास भी न जाना (वरना) फिर तुम अपना आप नुक़सान करोगे
ऐ लोगों अपने पालने वाले से डरो जिसने तुम सबको (सिर्फ) एक शख्स से पैदा किया और (वह इस तरह कि पहले) उनकी बाकी मिट्टी से उनकी बीवी (हव्वा) को पैदा किया और (सिर्फ़) उन्हीं दो (मियॉ बीवी) से बहुत से मर्द और औरतें दुनिया में फैला दिये और उस ख़ुदा से डरो जिसके वसीले से आपस में एक दूसरे से सवाल करते हो और क़तए रहम से भी डरो बेशक ख़ुदा तुम्हारी देखभाल करने वाला है
यह जवाब मुख्यधारा की सुन्नी समझ का अनुसरण करता है और सामान्य जानकारी है, फ़तवा नहीं। जहाँ मुसलमानों में मतभेद है, जवाब वह बता देता है। क्या आपका अपना कोई सवाल है? हमें लिखें.