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आम भ्रांतियाँ

क्या मुसलमान आदम और हव्वा में विश्वास करते हैं?

संक्षिप्त जवाब

जी हाँ। क़ुरआन आदम और उनकी पत्नी (परंपरा में हव्वा नाम) की कहानी बताता है, जिन्हें जन्नत में रखा गया और जिन्होंने शैतान की बात सुनकर ग़लती की, फिर तौबा की और माफ़ किए गए। मुसलमान अकेले हव्वा को दोषी नहीं ठहराते और न मूल पाप में विश्वास करते हैं।

विस्तृत जवाब

क़ुरआन में दोनों को बहकाया गया, और दोनों से ग़लती हुई। फिर आदम को अपने रब से कुछ कलिमात मिले और उन्होंने तौबा की, और अल्लाह ने उन्हें माफ़ किया और चुन लिया। इसलिए इंसान गुनाहगार पैदा नहीं होते: हर इंसान ईमान की स्वाभाविक अवस्था (फ़ितरत) में पैदा होता है और अपने कामों का ख़ुद ज़िम्मेदार है।

आदम इस्लाम में पहले नबी भी हैं, और सारे इंसान उनकी संतान हैं। इसीलिए इस्लाम इंसानी परिवार की बराबरी और एकता पर ज़ोर देता है। यह कहानी यह भी सिखाती है कि तौबा का दरवाज़ा हर किसी के लिए खुला है।

क़ुरआन से

وَقُلْنَا يَٰٓـَٔادَمُ ٱسْكُنْ أَنتَ وَزَوْجُكَ ٱلْجَنَّةَ وَكُلَا مِنْهَا رَغَدًا حَيْثُ شِئْتُمَا وَلَا تَقْرَبَا هَٰذِهِ ٱلشَّجَرَةَ فَتَكُونَا مِنَ ٱلظَّٰلِمِينَ ﴿٣٥﴾

और हमने आदम से कहा ऐ आदम तुम अपनी बीवी समैत बेहिश्त में रहा सहा करो और जहाँ से तुम्हारा जी चाहे उसमें से ब फराग़त खाओ (पियो) मगर उस दरख्त के पास भी न जाना (वरना) फिर तुम अपना आप नुक़सान करोगे

فَتَلَقَّىٰٓ ءَادَمُ مِن رَّبِّهِۦ كَلِمَٰتٍۢ فَتَابَ عَلَيْهِ ۚ إِنَّهُۥ هُوَ ٱلتَّوَّابُ ٱلرَّحِيمُ ﴿٣٧﴾

फिर आदम ने अपने परवरदिगार से (माज़रत के चन्द अल्फाज़) सीखे पस खुदा ने उन अल्फाज़ की बरकत से आदम की तौबा कुबूल कर ली बेशक वह बड़ा माफ़ करने वाला मेहरबान है

قَالَا رَبَّنَا ظَلَمْنَآ أَنفُسَنَا وَإِن لَّمْ تَغْفِرْ لَنَا وَتَرْحَمْنَا لَنَكُونَنَّ مِنَ ٱلْخَٰسِرِينَ ﴿٢٣﴾

ये दोनों अर्ज क़रने लगे ऐ हमारे पालने वाले हमने अपना आप नुकसान किया और अगर तू हमें माफ न फरमाएगा और हम पर रहम न करेगा तो हम बिल्कुल घाटे में ही रहेगें

يَٰٓأَيُّهَا ٱلنَّاسُ ٱتَّقُوا۟ رَبَّكُمُ ٱلَّذِى خَلَقَكُم مِّن نَّفْسٍۢ وَٰحِدَةٍۢ وَخَلَقَ مِنْهَا زَوْجَهَا وَبَثَّ مِنْهُمَا رِجَالًۭا كَثِيرًۭا وَنِسَآءًۭ ۚ وَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ ٱلَّذِى تَسَآءَلُونَ بِهِۦ وَٱلْأَرْحَامَ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ كَانَ عَلَيْكُمْ رَقِيبًۭا ﴿١﴾

ऐ लोगों अपने पालने वाले से डरो जिसने तुम सबको (सिर्फ) एक शख्स से पैदा किया और (वह इस तरह कि पहले) उनकी बाकी मिट्टी से उनकी बीवी (हव्वा) को पैदा किया और (सिर्फ़) उन्हीं दो (मियॉ बीवी) से बहुत से मर्द और औरतें दुनिया में फैला दिये और उस ख़ुदा से डरो जिसके वसीले से आपस में एक दूसरे से सवाल करते हो और क़तए रहम से भी डरो बेशक ख़ुदा तुम्हारी देखभाल करने वाला है

कृपया ध्यान दें

यह जवाब मुख्यधारा की सुन्नी समझ का अनुसरण करता है और सामान्य जानकारी है, फ़तवा नहीं। जहाँ मुसलमानों में मतभेद है, जवाब वह बता देता है। क्या आपका अपना कोई सवाल है? हमें लिखें.

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