जी हाँ। इस्लाम में ईमान क़बूल करना और सच्ची तौबा अतीत को मिटा देते हैं, और कोई गुनाह अल्लाह की माफ़ी के लिए बहुत बड़ा नहीं। क़ुरआन उन लोगों से जिन्होंने अपने ऊपर ज़ुल्म किया कहता है कि अल्लाह की रहमत से निराश न हों।
विस्तृत जवाब
पैग़ंबर ﷺ ने सिखाया कि इस्लाम उसे मिटा देता है जो उससे पहले था। एक प्रसिद्ध क़िस्सा उस आदमी का है जिसने निन्यानवे लोगों को क़त्ल किया था और पूछा कि क्या उसे माफ़ किया जा सकता है, और उससे कहा गया कि उसके और तौबा के बीच कुछ आड़े नहीं आता। पैग़ंबर ﷺ के वे साथी जिन्होंने पहले मुसलमानों को नुक़सान पहुँचाया था, जैसे ख़ालिद बिन वलीद और उमर, सबसे अच्छे मुसलमानों में गिने गए।
तौबा के लिए पछतावा, गुनाह रोकना, उसकी ओर न लौटने का संकल्प और, अगर दूसरों के साथ ग़लत हुआ हो, तो उसकी भरपाई ज़रूरी है। मुसलमान मानते हैं कि तौबा का दरवाज़ा तब तक खुला रहता है जब तक मौत के समय रूह गले तक न पहुँचे या सूरज पश्चिम से न निकले।
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ऐ मेरे (ईमानदार) बन्दों जिन्होने (गुनाह करके) अपनी जानों पर ज्यादतियाँ की हैं तुम लोग ख़ुदा की रहमत से नाउम्मीद न होना बेशक ख़ुदा (तुम्हारे) कुल गुनाहों को बख्श देगा वह बेशक बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
मगर (हाँ) जिस शख्स ने तौबा की और ईमान क़ुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए तो (अलबत्ता) उन लोगों की बुराइयों को ख़ुदा नेकियों से बदल देगा और ख़ुदा तो बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
यह जवाब मुख्यधारा की सुन्नी समझ का अनुसरण करता है और सामान्य जानकारी है, फ़तवा नहीं। जहाँ मुसलमानों में मतभेद है, जवाब वह बता देता है। क्या आपका अपना कोई सवाल है? हमें लिखें.