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आम भ्रांतियाँ

क्या अल्लाह चाँद का देवता है, और मस्जिदों पर अर्धचंद्र क्यों होता है?

संक्षिप्त जवाब

नहीं। यह एक भ्रांति है जिसका इतिहास या इस्लाम में कोई आधार नहीं। अल्लाह एक ईश्वर के लिए अरबी शब्द है, और क़ुरआन साफ़ कहता है कि सूरज या चाँद को सजदा न करो, बल्कि उस अल्लाह को करो जिसने उन्हें पैदा किया।

विस्तृत जवाब

इस्लाम से पहले अरब ईसाई ईश्वर के लिए अल्लाह शब्द इस्तेमाल करते थे, और यह नाम इस्लाम से पहले के ईसाई शिलालेखों में मिलता है। क़ुरआन किसी भी पैदा की गई चीज़ की इबादत से मना करता है। अर्धचंद्र क़ुरआन या शुरुआती मुस्लिम समुदाय में कोई प्रतीक नहीं था: इसे बाद में अपनाया गया, ज़्यादातर उस्मानी साम्राज्य द्वारा, और बहुत सी मस्जिदें और मुस्लिम देश इसका इस्तेमाल नहीं करते।

इस्लामी कैलेंडर चंद्र है, इसीलिए रमज़ान और ईद जैसी तारीख़ों के लिए चाँद अहम है। यह समय गिनने का तरीक़ा है, इबादत का नहीं।

क़ुरआन से

وَمِنْ ءَايَٰتِهِ ٱلَّيْلُ وَٱلنَّهَارُ وَٱلشَّمْسُ وَٱلْقَمَرُ ۚ لَا تَسْجُدُوا۟ لِلشَّمْسِ وَلَا لِلْقَمَرِ وَٱسْجُدُوا۟ لِلَّهِ ٱلَّذِى خَلَقَهُنَّ إِن كُنتُمْ إِيَّاهُ تَعْبُدُونَ ﴿٣٧﴾

और उसकी (कुदरत की) निशानियों में से रात और दिन और सूरज और चाँद हैं तो तुम लोग न सूरज को सजदा करो और न चाँद को, और अगर तुम ख़ुदा ही की इबादत करनी मंज़ूर रहे तो बस उसी को सजदा करो जिसने इन चीज़ों को पैदा किया है

قُلْ هُوَ ٱللَّهُ أَحَدٌ ﴿١﴾

(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ख़ुदा एक है

कृपया ध्यान दें

यह जवाब मुख्यधारा की सुन्नी समझ का अनुसरण करता है और सामान्य जानकारी है, फ़तवा नहीं। जहाँ मुसलमानों में मतभेद है, जवाब वह बता देता है। क्या आपका अपना कोई सवाल है? हमें लिखें.

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